रात के उस दूरभाष संवाद ने सब कुछ बदल दिया। गुलाबी पोशाक वाली लड़की की आंखों में डर साफ दिख रहा था। जब उसने घड़ी में दस बजे का समय देखा, तो लगा कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे मोड़ देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या वह अकेली है इस जंग में? हर पल संदेह बढ़ता जाता है। रात का सन्नाटा और भी गहरा लग रहा था।
समारोह का माहौल देखकर ही लगता है कि यहाँ सिर्फ खुशियां नहीं, बल्कि प्रतिद्वंद्विता भी है। नीली पोशाक वाली महिला के आगमन ने सबकी नजरें खींच लीं। गुलाबी परी थोड़ी घबराई हुई लग रही थी। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में यह समारोह किसी युद्ध के मैदान से कम नहीं लग रहा था। सबके चेहरे पर नकाब थे। कोई किसी का सच्चा साथी नहीं लग रहा था।
निहाल मेहता का आगमन धमाकेदार था। लाल लिबास में वह सबका ध्यान खींच रहे थे। लेकिन उनकी नजरें सिर्फ एक ही व्यक्ति पर टिकी थीं। क्या यह प्यार है या कोई खेल? असली वारिस, सच्ची जीत में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। उसकी बातों में एक अलग ही अकड़ थी जो सबको चुनौती दे रही थी। उसकी आवाज में भी एक अलग ही गूंज थी।
शराब गिरने वाला दृश्य बहुत ही नाटकीय था। धीमी गति में दिखाया गया कि कैसे एक नौकर ने जानबूझकर ऐसा किया। नीली रानी हैरान रह गई। गुलाबी पोशाक वाली लड़की के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। बदले की आग धीरे-धीरे सुलग रही थी। सबकी सांसें थम सी गई थीं।
मां और बेटी के बीच का संवाद बहुत भावुक था। बूढ़ी महिला अपनी बेटी को समझा रही थीं कि दुनिया कैसी है। गुलाबी परी को सख्त होना होगा। असली वारिस, सच्ची जीत में परिवार का समर्थन सबसे बड़ी ताकत है। उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन हौसला बुलंद था। यह रिश्ता दिल को छू गया। मां का आशीर्वाद ही उसकी ढाल है।