शुरुआत ही धमाकेदार है जब वो ट्रे गिरने वाली थी और नीली पोशाक वाली महिला ने बिना पलक झपकाए बचा लिया। इस असली वारिस, सच्ची जीत में कार्रवाई और नाटक का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिल रहा है। हर किसी की सांसें रुक गई थीं उस पल। कांच के टूटने की आवाज नहीं आई बल्कि तालियां बजने लगीं। यह क्षण किसी जादू से कम नहीं था जो पर्दे पर दिखाया गया। दर्शक भी हैरान रह गए। यह देखकर सबकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
लाल सूट वाले शख्स की नजरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। जब उसकी आंखों में तकनीक वाली सतह दिखा तो हैरानी हुई। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में यह विज्ञान कथा वाला मोड़ बहुत रोचक लग रहा है। वह शायद कुछ खास जांच कर रहा था। इस तरह की तकनीक का प्रयोग हिंदी कार्यक्रम में नया लगता है और दर्शकों को बांधे रखता है। सबको यह पसंद आ रहा है।
वेटर लड़की की घबराहट बिल्कुल असली लग रही थी। मुख्य किरदार ने न सिर्फ कांच बचाए बल्कि सबका ध्यान भी खींच लिया। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। माहौल में तनाव साफ झलक रहा है। उस महिला की पकड़ बहुत मजबूत थी। ऐसा लगा कि वह सालों से इसी के लिए तैयार थी। सबकी नजरें उन पर थीं। कोई हिला तक नहीं।
पार्टी का माहौल बहुत शानदार है लेकिन बीच में यह टकराव दिलचस्प है। सभी मेहमान हैरान हैं कि आखिर हुआ क्या है। असली वारिस, सच्ची जीत के इस कड़ी में सामाजिक स्तर का अंतर भी दिखाया गया है जो कहानी को गहराई देता है। बड़े घर की रौनक और बीच का यह हादसा। सबकी नजरें अब उन्हीं दोनों पर टिकी हुई हैं। माहौल गर्म है। सब देख रहे हैं।
दोनों मुख्य किरदारों के बीच की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। एक दूसरे को घूरने का अंदाज ही बता रहा है कि आगे क्या होने वाला है। असली वारिस, सच्ची जीत में प्रेम कहानी और दुश्मनी की लकीरें धुंधली होती दिख रही हैं। क्या वे दोस्त हैं या दुश्मन। यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है अभी। जवाब मिलना बाकी है। कौन जीतेगा।