जब उस बूढ़े आदमी ने अपनी हथेली से नीली रोशनी निकाली, तो मैं सच में डर गया। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे सीन बहुत कम देखने को मिलते हैं जहाँ जादू और इंसानियत एक साथ चलते हैं। उस सूट वाले शख्स की चीखें और फिर उसका गिर जाना, सब कुछ इतना रियल लगा कि मैं अपनी साँस रोके बैठा रहा।
उस औरत और बच्चे के चेहरे पर जो डर था, वो सीधे दिल में उतर गया। मशीन वाला प्रॉडिजी ने दिखाया कि कैसे एक छोटा सा परिवार बड़ी मुसीबतों का सामना करता है। जब वो बूढ़ा आदमी मुस्कुराया, तो लगा जैसे सब ठीक हो गया। ये सीन मुझे बहुत पसंद आया।
जब वो सैनिक आए और उस सूट वाले को पकड़ लिया, तो माहौल एकदम तनावपूर्ण हो गया। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे एक्शन सीन्स बहुत अच्छे हैं। हर सैनिक का पोशाक और उनका अंदाज़ बिल्कुल फिल्म जैसा लगा। मैं तो बस यही सोच रहा था कि आगे क्या होगा।
उस छोटे बच्चे की आँखों में जो उम्मीद थी, वो देखकर मेरा दिल पिघल गया। मशीन वाला प्रॉडिजी ने बच्चों के किरदार को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। वो बूढ़े आदमी को देखकर मुस्कुराया, तो लगा जैसे सब कुछ ठीक हो जाएगा। ये सीन बहुत इमोशनल था।
रात का वो अंधेरा और पीछे शहर की रोशनी, सब कुछ बहुत रहस्यमयी लग रहा था। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे सीन बहुत कम हैं जहाँ माहौल इतना गहरा हो। जब वो बूढ़ा आदमी खड़ा हुआ, तो लगा जैसे वो किसी बड़े रहस्य को सुलझाने वाला है।
जब वो दो बूढ़े आदमी मिले और एक दूसरे को गले लगाया, तो लगा जैसे पुरानी दोस्ती फिर से जिंदा हो गई। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे इमोशनल सीन्स बहुत अच्छे हैं। उनकी आँखों में जो खुशी थी, वो देखकर मैं भी खुश हो गया। ये सीन बहुत प्यारा था।
जब उस बूढ़े आदमी ने जादू किया और नीली रोशनी निकली, तो मैं सच में डर गया। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे सीन बहुत कम देखने को मिलते हैं। उस सूट वाले शख्स की चीखें और फिर उसका गिर जाना, सब कुछ इतना रियल लगा कि मैं अपनी साँस रोके बैठा रहा।
उस औरत ने अपने बच्चे को गले लगाया और उसे हिम्मत दी, ये सीन बहुत इमोशनल था। मशीन वाला प्रॉडिजी ने दिखाया कि कैसे एक माँ अपने बच्चे के लिए कुछ भी कर सकती है। उनकी आँखों में जो प्यार था, वो देखकर मैं भी रो पड़ा। ये सीन बहुत प्यारा था।
जब वो सैनिक आए और उस सूट वाले को पकड़ लिया, तो माहौल एकदम तनावपूर्ण हो गया। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे एक्शन सीन्स बहुत अच्छे हैं। हर सैनिक का पोशाक और उनका अंदाज़ बिल्कुल फिल्म जैसा लगा। मैं तो बस यही सोच रहा था कि आगे क्या होगा।
जब वो बूढ़ा आदमी मुस्कुराया, तो लगा जैसे सब कुछ ठीक हो गया। मशीन वाला प्रॉडिजी में ऐसे सीन बहुत कम हैं जहाँ एक मुस्कान इतनी मायने रखती हो। उसकी आँखों में जो खुशी थी, वो देखकर मैं भी खुश हो गया। ये सीन बहुत प्यारा था।
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