मशीन वाला प्रोडिजी में वो सीन जब छोटे बच्चे की उंगलियों से सुनहरी रोशनी फूटती है और सामने खड़े दुश्मन जलकर राख हो जाते हैं, रोंगटे खड़े कर देने वाला था। बूढ़े आदमी की हैरानी और बच्चे की मासूमियत का कॉन्ट्रास्ट कमाल का था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे विजुअल्स देखना किसी सिनेमा हॉल से कम नहीं लगता।
जब आसमान से वो स्टीमपंक स्टाइल की फ्लाइंग बाइक्स नीचे उतरती हैं, तो लगता है जैसे कोई और ही दुनिया खुल गई हो। मशीन वाला प्रोडिजी की ये दुनिया इतनी रियलिस्टिक है कि आप खुद को उस गली में खड़ा महसूस करेंगे। नीली रोशनी और धातु की चमक ने सीन को बहुत ही ग्रैंड बना दिया है।
बच्चे का एक सूखी लकड़ी को उठाकर उसे अपने जादू से हाई टेक स्केटबोर्ड में बदल देना सबसे क्रिएटिव मोड़ था। मशीन वाला प्रोडिजी में ये दिखाता है कि ताकत बाहर नहीं, अंदर होती है। वो नीली फ्लेम जो बोर्ड से निकलती है, वो एस्केप सीन को और भी रोमांचक बना देती है।
एक तरफ सख्त मिजाज बूढ़ा शख्स और दूसरी तरफ मासूम लेकिन ताकतवर बच्चा। मशीन वाला प्रोडिजी में इन दोनों के बीच का रिश्ता बहुत गहरा लगता है। जब बच्चा खतरे में होता है तो बूढ़े के चेहरे पर जो चिंता दिखती है, वो दिल को छू लेती है। ये सिर्फ एक्शन नहीं, इमोशन भी है।
बादलों के बीच वो विशाल सुनहरा गियर और बिजली का पोर्टल देखकर दिमाग सुन्न हो जाता है। मशीन वाला प्रोडिजी ने साइंस फिक्शन और फैंटेसी का ऐसा मिश्रण पेश किया है जो पहले कहीं नहीं देखा। वो पल जब पोर्टल खुलता है, लगता है अब कुछ भी हो सकता है।
काले कोट वाले दुश्मन जब भाग रहे थे और बच्चे ने मुस्कुराते हुए अपनी उंगलियों से उन्हें निशाना बनाया, तो वो सीन बहुत संतोषजनक था। मशीन वाला प्रोडिजी में बुराई पर अच्छाई की ये जीत बहुत ही स्टाइलिश तरीके से दिखाई गई है। बच्चे की वो शैतानी मुस्कान यादगार है।
मोबाइल स्क्रीन पर इतने बड़े विजुअल्स देखना आश्चर्यजनक है। मशीन वाला प्रोडिजी ने साबित कर दिया है कि छोटी स्क्रीन भी बड़े अनुभव दे सकती है। नेटशॉर्ट ऐप की क्वालिटी इतनी शार्प है कि हर डिटेल, हर स्पार्क साफ दिखाई देता है। ये एक नया स्टैंडर्ड है।
जब वो कमांडर अपनी बाइक पर बैठकर ऊपर देखता है, तो उसके चेहरे पर जो हैरानी और डर है, वो अगले सीन के लिए क्यूरियोसिटी बढ़ा देता है। मशीन वाला प्रोडिजी में हर किरदार का अपना वजन है। वो सलूट करता हुआ ऑफिसर बता रहा है कि अब असली खेल शुरू होने वाला है।
जब बूढ़ा और बच्चा उस जादुई बोर्ड पर सवार होकर दुश्मनों से भागते हैं, तो सांस रुक सी जाती है। मशीन वाला प्रोडिजी का ये एस्केप सीन किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म से कम नहीं है। पीछे पीछे आती हुई वो आर्मी और सामने खुला आसमान, बस कमाल का एक्शन है।
पूरा सीन रात के वक्त सेट है, जहाँ स्ट्रीट लाइट्स और जादुई रोशनी का मिलन एक सपनों जैसी दुनिया बनाता है। मशीन वाला प्रोडिजी की सिनेमेटोग्राफी इतनी समृद्ध है कि आप उस गली की नमी और ठंडक को महसूस कर सकते हैं। ये माहौल ही कहानी का एक किरदार बन गया है।
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