जब वह शख्स कुर्सी पटककर बैठ गया, तो कमरे में एक अजीब सी शांति छा गई। अलविदा, मेरी टेम्प्टिंग वाइफ -४ का यह अंत बहुत प्रभावशाली था। सब लोग बस एक दूसरे को देख रहे थे, कोई कुछ नहीं बोल रहा था। यह शांति तूफान से ज्यादा डरावनी थी। ऐसा लग रहा था जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो, लेकिन असल में यह तो बस शुरुआत थी।
वह औरत जो गहरे लाल रंग की ड्रेस में थी, उसका चेहरा डर से सफेद पड़ गया था। अलविदा, मेरी टेम्प्टिंग वाइफ -४ में उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन वह रो नहीं रही थी। शायद वह इस तरह के झगड़ों की आदी हो गई है। उसने अपने हाथ को शराबी आदमी के कंधे से हटा लिया, जैसे वह उसे छोड़ना चाहती हो। यह छोटी सी हरकत बहुत कुछ कह जाती है।
अलविदा, मेरी टेम्प्टिंग वाइफ -४ के इस सीन में मेज पर बिखरा खाना सब कुछ कह रहा था। फल, केक, ब्रेड सब जमीन पर गिर चुके थे। यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि उस परिवार की टूटी हुई खुशियां थीं। वह लाल मेजपोश अब गंदी लग रही थी। यह दृश्य बताता है कि कैसे एक झगड़े में सब कुछ बर्बाद हो सकता है। खाने की बर्बादी दिल को छू लेती है।
वह बूढ़ा आदमी जो मेज के सिर पर बैठा था, उसने एक शब्द नहीं बोला। अलविदा, मेरी टेम्प्टिंग वाइफ -४ में उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसकी आंखों में निराशा और गुस्सा दोनों थे। शायद वह इस सब का गवाह बनकर थक चुका है। उसकी खामोशी बताती है कि कभी-कभी बोलने से ज्यादा चुप रहना मुश्किल होता है।
अलविदा, मेरी टेम्प्टिंग वाइफ -४ में यह सीन देखकर मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। जब वह काली सूट वाला शख्स कुर्सी उठाकर पटकता है, तो लगता है जैसे कमरे में बिजली गिर गई हो। मेज पर बिखरा खाना और सबके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। वह औरत जो शराबी आदमी के कंधे पर हाथ रखे थी, अब सहमी हुई लग रही थी। यह तनाव इतना असली लगता है कि सांस रुक सी जाती है।