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(Dubbed) Dil Se Dil Tak

Aarav Singh, ek ameer ladka jo apni pehchaan chhupata hai, aur Anjali Sharma, ek aisi writer jo duniya se door rehti hai — dono online ek doosre ke confidants ban jaate hain. Apne sabse gehre raaz share karne ke baad bhi, dono real life mein hamesha ek doosre se chhoot jaate hain. Aakhir mein, ek bheedbhadi sadak par dono ek aisi adhoori confession dete hain jo kisi novel se bhi zyada gehri hai. Kya do alag duniya ke yeh log is baar ek ho paayenge? Kya unka pyaar is baar jeet paayega?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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ब्लाइंड डेट का ट्विस्ट

अंजलि जब घर पहुंची तो उसे लगा कि वह सिर्फ राहुल से मिलने आई है, लेकिन असल में अर्जुन गुप्ता वहां पहले से मौजूद था। यह सीन देखकर लगता है कि (डब्ड) दिल से दिल तक में प्लॉट ट्विस्ट बहुत ही शानदार तरीके से डिलीवर किए गए हैं। अर्जुन का अंजलि को देखकर मुस्कुराना और फिर उसका कन्फ्यूज होना, सब कुछ इतना नेचुरल लगा कि मैं भी उसकी जगह होती तो शायद यही रिएक्शन देती।

टीचर बनने का सपना

डाइनिंग टेबल पर जब अंजलि ने बताया कि वह टीचर बनने की तैयारी कर रही है, तो माहौल थोड़ा गंभीर हो गया। लेकिन अर्जुन का सपोर्टिव अंदाज और राहुल की चुप्पी, यह सब (डब्ड) दिल से दिल तक की खासियत है। मुझे लगा कि अंजलि के करियर के सपने और परिवार की उम्मीदों के बीच का टकराव बहुत रियलिस्टिक दिखाया गया है।

अर्जुन की चालाकी

अर्जुन ने अंजलि से कहा कि वह सर से डाउट्स पूछने आया था, लेकिन असल में वह ब्लाइंड डेट देखने आया था। यह डायलॉग सुनकर मुझे हंसी आ गई। (डब्ड) दिल से दिल तक में ऐसे हल्के-फुल्के मूमेंट्स बहुत अच्छे लगते हैं। अर्जुन का कैरेक्टर इतना चार्मिंग है कि आप उसकी हर बात पर यकीन कर बैठते हैं, चाहे वह झूठ ही क्यों न हो।

मां का प्यार और दबाव

अंजलि की मां जब कहती हैं कि लड़कियों के लिए स्टेबल जॉब अच्छी होती है, तो उसमें एक मां की चिंता और उम्मीद दोनों झलकती हैं। (डब्ड) दिल से दिल तक ने इस रिश्ते को बहुत बारीकी से दिखाया है। मुझे लगा कि यह सीन हर उस लड़की से जुड़ता है जो अपने सपनों और परिवार की उम्मीदों के बीच फंसी होती है।

पहली मुलाकात का जादू

अंजलि और अर्जुन की पहली मुलाकात जब वह उसे फ्रूट्स का बैग लेने में मदद करता है, तो उसमें एक अजीब सी केमिस्ट्री है। (डब्ड) दिल से दिल तक में ऐसे छोटे-छोटे मूमेंट्स बड़े इमोशनल कनेक्शन बनाते हैं। अर्जुन का 'तुम भी ना, कुछ भी पहनो अच्छी लगती हो' वाला डायलॉग तो दिल जीत लेता है।

राहुल की चुप्पी का राज

राहुल पूरे सीन में चुपचाप बैठा रहा, जबकि अर्जुन और अंजलि के बीच बातचीत चल रही थी। मुझे लगा कि (डब्ड) दिल से दिल तक में राहुल का कैरेक्टर शायद कुछ छुपा रहा है। उसकी चुप्पी और अर्जुन की बातूनी प्रकृति के बीच का कंट्रास्ट बहुत इंटरेस्टिंग है। शायद आगे चलकर राहुल का रोल और भी अहम हो जाएगा।

टीचिंग एग्जाम का टेंशन

जब अंजलि की मां ने पूछा कि वह टीचिंग एग्जाम दे रही है या नहीं, तो अंजलि का चेहरा देखकर लगा कि वह असमंजस में है। (डब्ड) दिल से दिल तक ने इस टेंशन को बहुत अच्छे से कैप्चर किया है। मुझे लगा कि अंजलि के मन में करियर को लेकर कन्फ्यूजन है, और यह बहुत रियल लगता है।

अर्जुन का कॉम्प्लिमेंट

अर्जुन ने अंजलि से कहा कि वह कुछ भी पहने अच्छी लगती है, और अंजलि ने जवाब दिया 'बड़ी मीठी बातें'। यह एक्सचेंज बहुत ही प्यारा था। (डब्ड) दिल से दिल तक में ऐसे डायलॉग्स रोमांस को बिना ओवरएक्टिंग के दिखाते हैं। मुझे लगा कि यह सीन दोनों के बीच की केमिस्ट्री को और भी गहरा करता है।

फैमिली डिनर का माहौल

डाइनिंग टेबल पर सबके बीच की बातचीत और अंजलि का थोड़ा असहज होना, यह सब (डब्ड) दिल से दिल तक की ताकत है। मुझे लगा कि यह सीन एक आम भारतीय परिवार के डिनर जैसा लगता है, जहां हर कोई एक-दूसरे के बारे में जानना चाहता है। अर्जुन का अंजलि को बैठने के लिए कहना बहुत पॉलाइट था।

अंजलि का कन्फ्यूजन

अंजलि जब अर्जुन से पूछती है कि वह यहां क्या कर रहा है, तो उसकी आवाज में कन्फ्यूजन और थोड़ी सी नाराजगी थी। (डब्ड) दिल से दिल तक ने इस इमोशन को बहुत अच्छे से दिखाया है। मुझे लगा कि अंजलि को लगा कि अर्जुन ने उसे पहले क्यों नहीं बताया, और यह उसकी फ्रस्ट्रेशन को दिखाता है।