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कथानक सार

Aarav Singh, ek ameer ladka jo apni pehchaan chhupata hai, aur Anjali Sharma, ek aisi writer jo duniya se door rehti hai — dono online ek doosre ke confidants ban jaate hain. Apne sabse gehre raaz share karne ke baad bhi, dono real life mein hamesha ek doosre se chhoot jaate hain. Aakhir mein, ek bheedbhadi sadak par dono ek aisi adhoori confession dete hain jo kisi novel se bhi zyada gehri hai. Kya do alag duniya ke yeh log is baar ek ho paayenge? Kya unka pyaar is baar jeet paayega?
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गलतफहमी का सुंदर खेल

इस शॉर्ट ड्रामा (डब्ड) दिल से दिल तक में फोन की बैटरी खत्म होना कितनी बड़ी गलतफहमी का कारण बना, यह देखकर हैरानी हुई। पुरुष पात्र का चेहरा जब वह सोचता है कि महिला ने उसे इग्नोर किया, तो उसकी आँखों में दर्द साफ दिखता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल मोमेंट्स देखना बहुत अच्छा लगता है।

सूट में उनकी खूबसूरती

काले सूट में पुरुष पात्र की एंट्री देखते ही दिल धड़कने लगा। हॉलवे में चलते हुए उनका स्टाइल और फिर फोन पर बात करते समय उनका एक्सप्रेशन कमाल का था। (डब्ड) दिल से दिल तक की यह सीन मुझे बार-बार देखनी अच्छी लग रही है। नेटशॉर्ट पर ऐसे किरदार मिलना दुर्लभ है।

सफेद साड़ी में जादू

महिला पात्र जब सफेद साड़ी में हॉलवे में खड़ी होती है और फोन देखकर परेशान होती है, तो लगता है जैसे कोई परी उदास हो गई हो। (डब्ड) दिल से दिल तक में उनकी एक्टिंग बहुत नेचुरल है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखकर मन हल्का हो जाता है।

बैटरी खत्म होने का ड्रामा

क्या कभी सोचा था कि एक साधारण सी बैटरी खत्म होने से इतना बड़ा ड्रामा हो सकता है? (डब्ड) दिल से दिल तक में यह प्लॉट बहुत ही रियलिस्टिक लगा। पुरुष और महिला दोनों के रिएक्शन देखकर लगता है कि हम खुद उस स्थिति में होते तो क्या करते। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट की कमी नहीं है।

आखिरी फोन कॉल की मिठास

जब पुरुष पात्र घर पर बैठकर फोन पर बात करता है और महिला पात्र किचन में पानी पीते हुए बात करती है, तो उस सीन में जो शांति है, वह दिल को छू लेती है। (डब्ड) दिल से दिल तक का यह अंत बहुत सुकून देने वाला था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे मोमेंट्स ही तो ढूंढते हैं हम।

हॉलवे की वो मुलाकात

हॉलवे में दोनों का एक-दूसरे को देखना और फिर चले जाना, यह सीन (डब्ड) दिल से दिल तक का सबसे इमोशनल पार्ट था। बिना डायलॉग के ही सब कुछ कह दिया गया। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि फिल्ममेकिंग कितनी बदल गई है।

मिस्टर रेहमान का गुस्सा

जब पुरुष पात्र फोन पर किसी से बात करते हुए गुस्सा दिखाता है, तो लगता है कि वह सच में उस महिला के लिए परेशान है। (डब्ड) दिल से दिल तक में उनके एक्सप्रेशन बहुत गहरे थे। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे किरदार देखकर लगता है कि हम भी उस कहानी का हिस्सा हैं।

घर का सुकून भरा माहौल

जब महिला पात्र घर पहुंचकर सफेद ड्रेस में किचन में जाती है और पुरुष पात्र सोफे पर बैठकर फोन चेक करता है, तो उस सीन में जो घरेलू माहौल है, वह बहुत प्यारा लगा। (डब्ड) दिल से दिल तक ने साधारण जीवन की खूबसूरती दिखाई। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामे देखना अच्छा लगता है।

गलतफहमी का अंत

आखिरकार जब दोनों के बीच की गलतफहमी दूर होती है और वे फोन पर बात करते हैं, तो लगता है कि सब कुछ ठीक हो गया। (डब्ड) दिल से दिल तक का यह मोड़ बहुत संतोषजनक था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे हैप्पी एंडिंग वाले ड्रामे कम ही मिलते हैं।

नेटशॉर्ट का जादू

(डब्ड) दिल से दिल तक जैसे शॉर्ट ड्रामे नेटशॉर्ट ऐप पर देखकर लगता है कि छोटी कहानियों में भी कितनी गहराई हो सकती है। पुरुष और महिला पात्र के बीच की केमिस्ट्री और फोन की बैटरी का प्लॉट बहुत यूनिक था। ऐसे कंटेंट के लिए नेटशॉर्ट को सलाम।