जब गुरु ने उस नंगे छाती वाले लड़के को देखा, तो उनकी आँखों में सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी। शायद वो जानते थे कि ये लड़का ही छुपा हुआ वुल्फ किंग बनने वाला है। उस पल की तनावपूर्ण खामोशी ने मुझे रोंगटे खड़े कर दिए।
वो लड़का जो लाल जैकेट पहने था, उसकी मुस्कान में कुछ छिपा था। जब गुरु ने उस नौजवान को डांटा, तो वो हंसा क्यों? क्या उसे पता था कि ये सब एक नाटक है? छुपा हुआ वुल्फ किंग की कहानी में हर चेहरा एक पहेली लगता है।
हॉल का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। जब गुरु चिल्लाए, तो पीछे खड़ी लड़की ने अपना सीना पकड़ लिया। ऐसा लगा जैसे छुपा हुआ वुल्फ किंग की ताकत सिर्फ मुक्कों में नहीं, बल्कि हवा में भी घुली हुई हो।
भूरे कोट वाला आदमी कुछ बोला नहीं, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ कह रही थीं। वो जानता था कि गुरु का गुस्सा असली नहीं, बल्कि एक परीक्षा है। छुपा हुआ वुल्फ किंग में ऐसे छोटे-छोटे इशारे ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
बिना शर्ट के खड़ा वो लड़का गुरु के सामने डरा नहीं। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी जिद्द थी। शायद यही वजह है कि छुपा हुआ वुल्फ किंग की कहानी में वो हीरो बनने वाला है। उसकी हिम्मत को सलाम!