जब वह लड़का जमीन पर गिरा और सब हंस रहे थे, तब स्कूल का शेर आदित्य की असली कहानी सामने आई। दोस्तों के नाम पर दुश्मन ही होते हैं कभी-कभी। उस लड़के की आंखों में आंसू और बाकियों के चेहरे पर मुस्कान, यह कंट्रास्ट दिल दहला देने वाला है।
आजकल के बच्चे इंसान की मदद करने के बजाय फोन निकाल लेते हैं। स्कूल का शेर आदित्य में यह सीन बहुत गहरा असर छोड़ता है। एक लड़का तकलीफ में है और बाकी सब उसे रिकॉर्ड कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने इंसानियत को कहीं खो दिया है लगता है।
जब मास्टर साहब और मैडम गलियारे में चल रहे थे, तब लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन स्कूल का शेर आदित्य में ट्विस्ट यह है कि वे कुछ कर नहीं पाए। अक्सर टीचर्स भी भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं या अनजान बनकर निकल जाते हैं।
पेट दर्द को लेकर इतना बड़ा तमाशा बनाना सही नहीं है। स्कूल का शेर आदित्य ने दिखाया कि कैसे एक छोटी सी बात को लेकर पूरा स्कूल इकट्ठा हो जाता है बस मजाक उड़ाने के लिए। उस बेचारे लड़के की हालत देखकर बहुत बुरा लगा।
सबके हाथ में फोन और चेहरे पर वही शैतानी मुस्कान। स्कूल का शेर आदित्य में यह दिखाया गया है कि कैसे वायरल होने की चाहत में बच्चे इंसानियत भूल जाते हैं। वह लड़का रो रहा है और ये सब सेल्फी ले रहे हैं, कितना अफसोसनाक है।