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स्कूल का शेर आदित्यवां54एपिसोड

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स्कूल का शेर आदित्य

अपराध दुनिया छोड़कर आदित्य यादव पढ़ाई के लिए पूर्वनगर के लिली हाई स्कूल आता है, पर यहाँ उसे सिर्फ़ धूम्रपान, मारपीट और गैंगबाज़ी दिखती है। उसकी दोस्ती मनीष तिवारी और सोनम वर्मा से होती है। जब रोहित मल्होत्रा मनीष को अपमानित कर देता है और वह कूद जाता है, तो आदित्य भड़क उठता है और अपनी ताकत दिखाता है। जल्द ही उसे पता चलता है कि सबके पीछे गैंग लीडर करण चौहान है, और दोनों के बीच अंतिम भिड़ंत तय हो जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बेटे की बेइज्जती सहन नहीं हुई

स्कूल का शेर आदित्य का यह एपिसोड इमोशनल रोलरकोस्टर था। जब उस लड़के ने अपने पिता को नीचा दिखाया, तो बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने साफ कर दिया कि उसका बेटा किसी से कम नहीं है। दूसरी तरफ वो शक्सी कोट वाला लड़का बहुत घमंडी लग रहा था। क्लास में खड़ी भीड़ की प्रतिक्रियाएं देखने लायक थीं, सबकी सांसें रुकी हुई थीं।

पावर डायनामिक्स का खेल

इस सीन में पावर गेम बहुत साफ दिखाई देता है। स्कूल का शेर आदित्य में दो पिताओं के बीच की ठनी हुई थी। एक तरफ अमीर और प्रभावशाली बाप, दूसरी तरफ साधारण कपड़ों वाला पिता। जब बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी बात रखी, तो सामने वाले के होश उड़ गए। यह सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक हैसियत की लड़ाई थी। डायलॉग डिलीवरी और एक्टिंग ने सीन को और भी दमदार बना दिया है।

क्लासरूम में तूफान

शांत क्लासरूम अचानक युद्ध के मैदान जैसा लगने लगा। स्कूल का शेर आदित्य के इस सीन में हर किरदार का रिएक्शन परफेक्ट था। वो लड़का जो जैकेट पहने खड़ा था, उसकी आँखों में आश्चर्य था। टीचर्स और बाकी स्टूडेंट्स बस तमाशबीन बने रहे। जब बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी बात कही, तो सन्नाटा छा गया। यह दिखाता है कि कैसे एक गलतफहमी पूरे माहौल को खराब कर सकती है। बहुत ही रियलिस्टिक सीन था।

घमंड का अंजाम

उस लड़के का घमंड देखकर चिढ़ होती है जो शेर वाले कोट में था। उसने सोचा था कि वो सब पर राज करेगा, लेकिन स्कूल का शेर आदित्य में उसकी धज्जियां उड़ गईं। बुजुर्ग व्यक्ति ने उसे ऐसे जवाब दिया कि वो बस देखता ही रह गया। यह सीन सिखाता है कि कभी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए। एक्टिंग इतनी नेचुरल थी कि लगा जैसे हम वहीं मौजूद हों। नेटशॉर्ट पर ऐसे ही कंटेंट देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं।

पिता का प्यार और गुस्सा

जब एक पिता अपने बेटे के लिए लड़ता है, तो उसमें जो जज्बात होते हैं, वो स्कूल का शेर आदित्य में खूब दिखाए गए हैं। बुजुर्ग व्यक्ति का चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था, लेकिन उसकी आँखों में बेटे के लिए फिक्र भी थी। दूसरे पिताजी की हंसी और मजाक उड़ाने का अंदाज बहुत ही नकारात्मक था। यह सीन पेरेंटिंग और इगो के बीच की लड़ाई को बहुत अच्छे से दर्शाता है। दर्शक इससे कनेक्ट जरूर करेंगे।

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