जब आदित्य को मैसेज आता है कि उसके पिता शहर पहुंच गए हैं, तो उसके चेहरे पर जो चिंता और हैरानी दिखती है, वह लाजवाब है। वह प्रोक्टर से बात करते समय भी शांत रहने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी आंखें सब बता रही हैं। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे सीन्स ही शो को अलग बनाते हैं। क्लास में दाखिल होती महिला टीचर का एंट्री भी बहुत सस्पेंस बनाती है, लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है।
प्रोक्टर का हाथ में स्केल लेकर खड़ा होना और छात्रों को डराना, यह सीन बहुत ही इंटेंस है। खासकर वह लड़का जो ब्राउन जैकेट पहने है, वह बार-बार इधर-उधर देख रहा है, जो उसकी घबराहट को दर्शाता है। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे किरदारों को बहुत गहराई से दिखाया गया है। जब वह महिला टीचर क्लास में आती है, तो सबकी निगाहें उस पर टिक जाती हैं, यह सस्पेंस बहुत अच्छा है।
आदित्य के फोन पर मैसेज आना और वह मैसेज पढ़कर चौंक जाना, यह सीन कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट लाता है। लगता है उसके पिता का आना उसके लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। स्कूल का शेर आदित्य की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है क्योंकि इससे आदित्य के बैकग्राउंड के बारे में पता चलता है। क्लासरूम में सन्नाटा और टीचर का एंट्री, सब कुछ बहुत ही ड्रामेटिक तरीके से पेश किया गया है।
परीक्षा हॉल का माहौल बहुत ही तनावपूर्ण है, हर छात्र अपने पेपर में व्यस्त है लेकिन आदित्य का ध्यान कहीं और है। प्रोक्टर की सख्त निगाहें और छात्रों की घबराहट, यह सब बहुत ही रियल लगता है। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे सीन्स ही शो को दिलचस्प बनाते हैं। जब वह महिला टीचर क्लास में आती है, तो सबकी निगाहें उस पर टिक जाती हैं, यह सस्पेंस बहुत अच्छा है।
आदित्य के फोन पर मैसेज आना और वह मैसेज पढ़कर चौंक जाना, यह सीन उसके और उसके पिता के रिश्ते के बारे में बहुत कुछ बताता है। लगता है उसके पिता का आना उसके लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे सीन्स ही शो को अलग बनाते हैं। क्लास में दाखिल होती महिला टीचर का एंट्री भी बहुत सस्पेंस बनाती है, लगता है अब कुछ बड़ा होने वाला है।