हॉलवे में खड़ी लाइन और प्रोक्टर का सख्त रवैया देखकर पुराने स्कूल के दिन याद आ गए। वो लड़का जो बॉक्स लेकर खड़ा है, उसकी चिंता साफ़ झलक रही है। स्कूल का शेर आदित्य में दिखाया गया यह माहौल इतना रियलिस्टिक है कि हर स्टूडेंट इसे महसूस कर सकता है।
वो तीन लड़के जो साथ खड़े हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज बताती है कि वे किसी मुसीबत में फंसने वाले हैं या फिर कोई बड़ा प्लान बना रहे हैं। स्कूल का शेर आदित्य की यह ट्रियो बहुत ही दमदार लग रही है। उनकी दोस्ती और वफादारी आगे की कहानी का अहम हिस्सा बनने वाली है।
ग्रे जैकेट वाला प्रोक्टर हाथ में स्केल लेकर जब बाहर आया, तो माहौल में एक अजीब सी खामोशी छा गई। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है। लगता है स्कूल का शेर आदित्य में यह किरदार किसी बड़े ट्विस्ट की चाबी साबित होगा। उसकी हरकतें बहुत संदिग्ध लग रही हैं।
लड़की का फोन जमा करते वक्त का डरा हुआ चेहरा बहुत ही रिलेटेबल है। आज के ज़माने में फोन के बिना रहना किसी सज़ा से कम नहीं। स्कूल का शेर आदित्य ने इस छोटे से सीन में बहुत बड़ी सच्चाई दिखा दी है। हर किसी के चेहरे पर वही 'अब क्या होगा' वाला भाव था।
बाहर बैठकर घड़ी देख रही लड़की और अंदर जाने वाले छात्रों के बीच का कंट्रास्ट बहुत गहरा है। बाहर शांति है लेकिन अंदर तूफान आने वाला है। स्कूल का शेर आदित्य की यह कहानी शायद सफलता और असफलता के बीच की लड़ाई के बारे में है। हर चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी है।