नीचे खड़ी भीड़ जिस तरह हंस रही है, वह इंसानियत के लिए शर्मनाक है। स्कूल का शेर आदित्य ने दिखाया कि कैसे भीड़ का हिस्सा बनकर इंसान अपनी संवेदनाएं खो देता है। एक लड़का तड़प रहा है और बाकी तालियां बजा रहे हैं। यह सीन देखकर गुस्सा आता है, पर यही तो असलियत है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना दुर्लभ है जो समाज का आईना दिखाएं।
यह कहानी खून से लिखी गई है, स्याही से नहीं। स्कूल का शेर आदित्य में हर सीन दर्दनाक है, पर इतना गहरा कि रुक नहीं सकते। जब वह लड़का खून से सना फॉर्म दिखाता है, तो लगता है जैसे उसने अपना दिल निकालकर रख दिया हो। नेटशॉर्ट पर ऐसे पावरफुल सीन देखकर कहानी से जुड़ाव और भी गहरा हो जाता है। यह सिर्फ एक शॉर्ट फिल्म नहीं, एक अनुभव है।
ऊपर खिड़की में खड़ा चश्मे वाला लड़का कितना शांत है, जबकि नीचे तबाही मची है। स्कूल का शेर आदित्य में यह कंट्रास्ट कमाल का है। लगता है वही सबका मास्टरमाइंड है। उसकी आंखों में कोई पछतावा नहीं, बस एक अजीब सी मुस्कान है। जब वह हाथ उठाता है, तो लगता है जैसे किसी अदृश्य धागे से कठपुतलियां नाच रही हों। यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर से कम नहीं है।
नीचे खड़े लड़के जिस तरह हंस रहे हैं, वह हंसी नहीं, पागलपन है। स्कूल का शेर आदित्य ने दिखाया कि कैसे भीड़ का हिस्सा बनकर इंसान बेरहम हो जाता है। एक लड़का जमीन पर तड़प रहा है और बाकी तालियां बजा रहे हैं। यह सीन देखकर गुस्सा आता है, पर यही तो असलियत है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना दुर्लभ है जो समाज का आईना दिखाएं।
जब लाइब्रेरी में वह लड़का और लड़की खड़े होते हैं, तो सब कुछ शांत लगता है, पर उनकी आंखों में तूफान है। स्कूल का शेर आदित्य में यह सीन बताता है कि कैसे कुछ लोग चुपचाप सब देख रहे होते हैं। लड़की की आंखों में आंसू हैं, पर वह कुछ नहीं कह पा रही। यह चुप्पी चीख से ज्यादा दर्दनाक है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल सीन देखकर मन भर आता है।