इस पूरे हंगामे में चश्मे वाला लड़का सबसे अलग लग रहा है। जब सब डरे हुए हैं या बेहोश हैं, वह इतना शांत कैसे खड़ा है? उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है। लगता है स्कूल का शेर आदित्य में वह कोई खास किरदार निभा रहा है जो इस सबके पीछे की सच्चाई जानता है। उसका हर एक्सप्रेशन गहराई से सोचने पर मजबूर करता है।
जिस लड़के के गाल पर चोट के निशान हैं, उसका डरा हुआ चेहरा देखकर सहानुभूति होती है। वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रहा है, जैसे कोई खतरा पीछा कर रहा हो। स्कूल का शेर आदित्य ने इस सीन में इमोशन को बहुत अच्छे से पकड़ा है। कैफेटेरिया की खाली कुर्सियां और बिखरे हुए छात्र एक डरावना दृश्य पेश कर रहे हैं जो दर्शक को बांधे रखता है।
अचानक जो एक्शन हुआ, उसने सबकी सांसें रोक दीं। एक लड़के को हवा में उछालकर पटक दिया गया, यह दिखाता है कि यहाँ साधारण लड़ाई नहीं हो रही। स्कूल का शेर आदित्य में एक्शन सीन्स की कोरियोग्राफी बहुत दमदार है। ज़मीन पर गिरने की आवाज़ और दूसरों की चीखें माहौल को और भी तनावपूर्ण बना देती हैं।
जब बाकी छात्र होश में आते हैं और अपने दोस्तों को ज़मीन पर पड़ा देखते हैं, तो उनके चेहरे पर जो घबराहट है, वह बहुत असली लगती है। वे एक-दूसरे को सहारा दे रहे हैं। स्कूल का शेर आदित्य में दोस्ती और मुसीबत के समय एकजुट होने का जज़्बा बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। यह सीन दिल को छू लेता है।
चश्मे वाले लड़के का चेहरा बिल्कुल पत्थर जैसा है। न डर, न घबराहट। वह सब कुछ बहुत बारीकी से देख रहा है। लगता है स्कूल का शेर आदित्य में वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या फिर वह सबको बचाने वाला हीरो है। उसकी चुप्पी सबसे ज़्यादा शोर मचा रही है और दर्शक के मन में सवाल पैदा कर रही है।