जब दूसरा आदमी दौड़ता हुआ आया और रस्सी काटने लगा, तो लगा कि शायद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन वह गई, बर्फ़ गिरी की तरह अचानक विस्फोट हो गया। अस्पताल का सीन देखकर दिल दहल गया, जहां घायल आदमी को स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा था। यह शॉर्ट फिल्म इतनी तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है कि सांस लेने का भी मौका नहीं मिलता।
अस्पताल के कॉरिडोर में वह लड़की, जो बम से बची थी, अब घबराई हुई खड़ी थी। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसे ही डॉक्टर ने कुछ बताया, उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। चश्मे वाला आदमी, जिसका हाथ पट्टी में था, उससे बात कर रहा था। यह कहानी जितनी आगे बढ़ती है, उतनी ही उलझती जाती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामा देखना बहुत रोमांचक है।
शुरुआत में लगा कि सफेद कोट वाली लड़की बेचारी है, लेकिन जब उसने रिमोट निकाला, तो सब समझ आ गया। वह गई, बर्फ़ गिरी की तरह सब कुछ पलट गया। पार्किंग लॉट का माहौल और पात्रों के चेहरे के भाव इतने रियल थे कि लगा मैं वहीं मौजूद हूं। यह शॉर्ट फिल्म साबित करती है कि कम बजट में भी बेहतरीन कहानी बनाई जा सकती है।
बम पर लाल रंग का टाइमर जब उलटी गिनती गिन रहा था, तो हर सेकंड एक सदी जैसा लग रहा था। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसे ही विस्फोट हुआ, स्क्रीन पीली पड़ गई। अस्पताल में घायल आदमी की हालत देखकर दुख हुआ। यह कहानी इंसानी रिश्तों और धोखे पर एक गहरा प्रहार करती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे कंटेंट मिलना सुकून देता है।
पहले तो लगा कि जमीन पर गिरा हुआ आदमी विलेन है, लेकिन बाद में पता चला कि खेल कुछ और ही है। वह गई, बर्फ़ गिरी की तरह सच्चाई सामने आई। सफेद कोट वाली लड़की की चालाकी और दूसरे आदमी की बेबसी देखकर हैरानी हुई। अस्पताल का सीन और डॉक्टर की एंट्री ने कहानी को नया मोड़ दिया। यह शॉर्ट फिल्म बहुत ही दमदार है।