फ्लैशबैक सीन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब साक्षी की मां की तस्वीर तोड़ी गई और उसे जबरदस्ती बाहर खींचा गया, तब समझ आया कि आज की यह ठंडक कहां से आती है। वह गई, बर्फ़ गिरी, साक्षी का वह रोना और फिर रुद्र को बचाना, सब कुछ जुड़ रहा है। आज वह उसी घर में वापस आई है, लेकिन अब वह मासूम लड़की नहीं, एक बदला लेने वाली रानी है।
रुद्र का किरदार सबसे ज्यादा पेचीदा लग रहा है। एक तरफ वह साक्षी को हीरे का हार देकर खुश कर रहा है, और दूसरी तरफ उसकी नजरें साक्षी पर टिकी हैं। वह गई, बर्फ़ गिरी, जब साक्षी ने उसे गले लगाया, तो रुद्र की आंखों में जीत थी, लेकिन साक्षी की आंखों में एक अलग ही चमक थी। क्या रुद्र सच में साक्षी से प्यार करता है या वह सिर्फ एक मोहरा है?
पूल साइड वाला सीन सबसे बेहतरीन था। साक्षी और साक्षी का आमना-सामना, बिना किसी शोर के, सिर्फ आंखों की भाषा में। वह गई, बर्फ़ गिरी, साक्षी ने जैसे ही हाथ बढ़ाया, साक्षी ने उसे ठुकरा दिया। उस पल में सालों की नफरत और दर्द समाया हुआ था। साक्षी की वह मुस्कान जो कह रही थी कि अब खेल बदलने वाला है।
रुचि का किरदार सच में नफरत करने लायक है। जब उसने साक्षी की मां की तस्वीर तोड़ी और साक्षी को धक्का दिया, तो गुस्सा आ गया। वह गई, बर्फ़ गिरी, आज वही रुचि साक्षी के सामने खड़ी है, लेकिन साक्षी अब अकेली नहीं है। उसकी आंखों में जो आग है, वह इस घर की नींव हिला देने के लिए काफी है।
साक्षी का किरदार कमाल का है। काली साड़ी में वह किसी देवी से कम नहीं लग रही, जो अपने अधिकार के लिए खड़ी है। वह गई, बर्फ़ गिरी, जब वह पार्टी में एंट्री करती है, तो हर कोई उसे देखता है। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह जानती है कि कैसे बिना बोले सब कुछ कहना है।