जिस पल नौकर चाय लेकर आया और कान में कुछ फुसफुसाया, उस आदमी के चेहरे के भाव बदल गए। वह मुस्कान जो पहले थी, अब गंभीरता में बदल गई। लगता है बाहर कुछ बड़ा होने वाला है। वह गई, बर्फ़ गिरी वाली फीलिंग तब आई जब उसने खिड़की से बाहर देखा, जैसे कोई तूफान आने वाला हो।
सीन बदलते ही माहौल पूरी तरह बदल गया। वह लड़की अब नीली पोशाक में थी और एक नया आदमी चश्मे के साथ आया। उसकी चाल में एक अलग ही रौब था। जब उसने लड़की का हाथ पकड़ा, तो लगा कहानी में नया मोड़ आ गया है। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसा अहसास हुआ जब उसने पीछे मुड़कर देखा।
यह चश्मा पहना आदमी साधारण नहीं लग रहा। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है, जैसे वह सब कुछ जानता हो। जब वह लड़की से बात कर रहा था, तो उसकी आवाज में एक अलग ही ठंडक थी। वह गई, बर्फ़ गिरी वाली लाइन सही मायने में इसी किरदार पर फिट बैठती है।
पहला हिस्सा जहां सिर्फ दो लोग थे और एक शांत कमरा, और दूसरा हिस्सा जहां बाहर का शोर और नए लोग। यह कंट्रास्ट बहुत गजब का है। लगता है वह लड़की दो अलग-अलग दुनिया के बीच फंसी है। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसा माहौल तब बना जब वह दरवाजे पर खड़ी होकर सोच रही थी।
इस वीडियो की खासियत यह है कि यहां डायलॉग से ज्यादा एक्शन बोल रहे हैं। पट्टी बांधना, कान में फुसफुसाना, हाथ पकड़ना - हर हरकत एक संदेश दे रही है। वह गई, बर्फ़ गिरी जैसी स्थिति तब आई जब सब कुछ रुक सा गया और सिर्फ नजरें मिल रही थीं।