
पूरे हॉल में हथियारबंद लोग और बीच में दो औरतें पिस्तौल ताने खड़ी हैं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा धमाका होने वाला हो। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया ने तनाव को इतनी खूबसूरती से दिखाया कि हर पल लगता था अब कुछ भी हो सकता है। सीन की बनावट और सेटिंग बेहतरीन है।
जब एक बेटी अपने पिता के लिए बदला लेने उतारू हो जाए तो क्या होता है, ये मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया ने बहुत खूब दिखाया। सफेद सूट वाली लड़की का हर कदम गुस्से और दर्द से भरा था। काले सूट वाली औरत भी कम नहीं थी। दोनों के बीच की दुश्मनी इतनी गहरी लगती है कि देखकर डर लगता है।
पूरे वीडियो में तनाव कभी कम नहीं हुआ। हर सीन के बाद लगता था अब क्या होगा। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया ने दर्शकों को बांधे रखा। जब अंत में बेटी ने पिस्तौल तानी तो लगता था जैसे सब कुछ खत्म हो जाएगा। ऐसे ड्रामे देखकर ही असली मनोरंजन का अहसास होता है।
जब बेटी ने अपने घायल पिता को गले लगाया और रोने लगी, तो उसकी आंखों में सिर्फ प्यार था। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया में ऐसे पल हैं जो इंसान को रुला देते हैं। पिता की हालत देखकर बेटी का दर्द इतना असली लगता है कि लगता है जैसे हम भी वहीं मौजूद हों।
जब सफेद सूट पहनी लड़की ने पिस्तौल निकाली तो पूरा हॉल सन्न रह गया। उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन चेहरे पर इतना गुस्सा कि कोई भी डर जाए। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया में ऐसा सीन पहले कभी नहीं देखा। काले सूट वाली औरत भी पीछे नहीं हटी, दोनों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि सांस रुकने लगी।
एक तरफ बेटी के आंसू, दूसरी तरफ पिस्तौल की गोली। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया में ऐसे सीन हैं जहां इमोशन और एक्शन दोनों बराबर हैं। जब बेटी ने पिता के चेहरे को हाथ से छुआ तो लगता था जैसे वक्त थम गया हो। ऐसे सीन देखकर हीरोइन की ताकत का अंदाजा होता है।
शानदार महल, सोने की कुर्सी, शेर की मूर्ति और बीच में खून से सना ड्रामा। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया ने दिखाया कि कैसे खूबसूरती के पीछे कितना अंधेरा छिपा हो सकता है। हर डिटेल पर ध्यान दिया गया है। कपड़े, ज्वेलरी, सेटिंग सब कुछ राजसी लगता है लेकिन कहानी खूनी है।
काले और सफेद सूट वाली दो औरतों के बीच ये मुकाबला देखकर लगता है जैसे दो तूफान आमने-सामने हों। एक की आंखों में नफरत, दूसरी की आंखों में दर्द। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया में ऐसे किरदार देखकर हैरानी होती है कि कैसे एक ही परिवार में इतना विरोध हो सकता है। दोनों की एक्टिंग जबरदस्त है।
शेर की मूर्ति के सामने ये खूनी ड्रामा देखकर लगता है जैसे कोई राजसी युद्ध छिड़ गया हो। घायल आदमी को गोद में लेकर लड़की का रोना दिल को छू गया। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया ने दिखाया कि कैसे प्यार और बदला एक साथ चल सकते हैं। हर फ्रेम में इतनी इमोशनल पावर है कि देखते रहने का मन करता है।
जब बेटी ने अपने घायल पिता को गोद में लिया और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे, तो हर दर्शक की आंखें नम हो गईं। मिस्ट्रेस बना कर फ्रेम किया में ऐसे सीन हैं जो सीधे दिल पर वार करते हैं। पिता की हालत देखकर बेटी का गुस्सा और दर्द दोनों साफ दिख रहे थे। ये सीन भूलना मुश्किल है।


इस एपिसोड की समीक्षा