अर्णव सिंह ने पश्चिमी खदान के सैकड़ों खनिकों को, जो अभी-अभी सैकड़ों मीटर नीचे से ऊपर आए थे, संग लेकर खदान की लगभग बंद होने वाली दूसरी कैंटीन को लाइन लगाने वाली जगह बना दिया। पर किसे पता था कि यह लालची मालिक राकेश कुमार जब खूब कमा लेता है, तो हम खनिकों की भूख को ही बुरा कहने लगता है...