सुमित वर्मा तीन हजार वर्ष की साधना के बाद आकाश नगर में साधारण जीवन जीता है, पर धर्मसूची उसकी पहचान उजागर कर देती है। उसके दिव्य अस्त्र, महान गुरु रूप और लावण्या, निशा रेड्डी, नागकन्या रश्मि से संबंध सामने आते हैं। संकट में वह सबकी रक्षा करता है, परीक्षा पार कर पुनर्जन्म पाता है और अंत में संसार को बचाकर सुखपूर्वक जीवन जीता है।