खाने की मेज पर यह चुप्पी बहुत शोर मचा रही है। बुजुर्ग महिला की मुस्कान के पीछे कुछ छिपा है, और लड़के की बेचैनी साफ दिख रही है। क्या यह सिर्फ एक साधारण परिवार का खाना है या कुछ और? वह पुरुष है? देखकर लगता है कि कहानी में बहुत गहराई है। माहौल त्योहार का है पर दिलों में तनाव है। सूप का प्याला देते वक्त जो नज़ारा था, वो कहानी बदल सकता है।
लाल लालटेनों के नीचे यह दावत कुछ अलग ही लग रही है। बैंगनी पोशाक वाली महिला का व्यवहार बहुत देखने लायक है। उसने लड़के के कंधे पर हाथ रखा, पर नज़रें कुछ और ही देख रही हैं। वह पुरुष है? में ऐसे मोड़ आते हैं जो सांस रोक दें। छोटी लड़की चुपचाप खा रही है, पर उसकी आंखें सब देख रही हैं। हर निगलने में एक राज छिपा है।
बेज स्वेटर वाले लड़के के चेहरे पर हैरानी साफ झलक रही है। उसे समझ नहीं आ रहा कि यह प्यार है या कोई साजिश। खाने के बीच में यह नाटक बहुत दिलचस्प है। वह पुरुष है? की कहानी धीरे धीरे खुल रही है। चाची का प्यार भरा व्यवहार भी कभी कभी डरावना लग सकता है। मुझे यह मनोवैज्ञानिक खेल बहुत पसंद आ रहा है।
खाने की टेबल पर बैठे हर शख्स का अपना एक राज है। सूप परोसने का तरीका बहुत अजीब था, जैसे कोई दवा दे रही हों। वह पुरुष है? में रिश्तों की यह उलझन कमाल की है। लड़की के हाथ में कांटे और चेहरे पर बेरुखी देखकर लगता है कि यह कुछ जानती है। यह नाटक बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है।
त्योहार की रोशनी में भी यह कमरा अंधेरा लग रहा है। बैंगनी लेस वाली महिला का प्रभुत्व स्पष्ट है, लेकिन लड़का विद्रोह करना चाहता है। वह पुरुष है? में पात्रों के बीच की खिंचातान देखने लायक है। खाना ठंडा हो रहा है पर बातें गर्म हैं। मुझे यह कड़ी बहुत पसंद आया, अगला भाग कब आएगा। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मज़ा ही अलग है।
हाथ मिलाने और कटोरी देने के बीच का वो पल बहुत भारी था। लड़के की उंगलियां कांप रही थीं, शायद डर से या गुस्से से। वह पुरुष है? की कहानी में हर छोटी चीज़ मायने रखती है। महिला की मुस्कान में एक चालाकी है जो आसानी से पकड़ नहीं आती। यह परिवार साधारण नहीं लग रहा है बिल्कुल भी।
खाना खाते वक्त कोई बात नहीं हो रही, बस बर्तनों की आवाज़ है। यह खामोशी चीख रही है कि कुछ गड़बड़ है। वह पुरुष है? में ऐसे सीन दिल पर दस्तक देते हैं। लड़की ने जब चावल का दाना चुना, तो लगा यह समय काट रही है। माहौल में तनाव को महसूस किया जा सकता है। बहुत ही बेहतरीन अभिनय है सभी का।
बाहर हरियाली है और अंदर यह उलझन। खिड़की से दिखता नज़ारा और अंदर का नाटक बिल्कुल विपरीत है। वह पुरुष है? में दृश्य कला बहुत अच्छी है। महिला ने जब सूप दिया तो लड़के ने इनकार नहीं किया, क्यों? शायद मजबूरी है या कोई बड़ा राज। मुझे यह पहेली सुलझानी है जल्दी।
कपड़ों के रंग भी कहानी कह रहे हैं। बैंगनी गहराई है, बेज मासूमियत और ग्रे उदासी। वह पुरुष है? में पोशाक डिजाइन भी किरदारों को बयां करता है। खाने की मेज पर यह जंग चुपचाप लड़ी जा रही है। कोई चिल्ला नहीं रहा पर सब कुछ टूट रहा है। यह चुप्पी वाला नाटक बहुत असरदार है।
अंत में सब खा रहे हैं, पर किसी को स्वाद नहीं आ रहा। चेहरों के भाव बता रहे हैं कि यह मिलन नहीं, कोई परीक्षा है। वह पुरुष है? का यह सीन यादगार बन गया है। महिला की आंखों में एक चमक है जो खतरनाक लग रही है। मैं अगली कड़ी का इंतज़ार नहीं कर सकता। कहानी बहुत आगे बढ़ गई है।