अरबपति रुद्र सिंह ने तेरह साल घरेलू पति बनकर बिताए। उसकी पत्नी तारा का विक्रम मेहता से अफेयर निकला और गर्भपात का दोष रुद्र पर डाला गया। तलाक माँगने पर तारा ने उसका अपमान किया। रुद्र ने घर छोड़ा और असली पहचान में बड़े कारोबारी के रूप में लौटा, फिर तारा की कंपनी की सारी फंडिंग बंद कर दी। तारा को टेक समिट में अक्षर कैपिटल से मदद की उम्मीद थी, लेकिन वहाँ उतरने वाला वही रुद्र था। सबके सामने उसने तारा और विक्रम को बर्बाद कर दिया। तारा को पछतावा हुआ, लेकिन देर हो चुकी थी।