क्रिसमस का त्योहार था, लेकिन प्यार, झूठ और धोखा का खेल चल रहा था। सजावट और खुशियाँ सब झूठी थीं। जब पैसे गिरे तो सबका असली चेहरा सामने आ गया। ये त्योहार नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश थी जहाँ हर कोई किसी न किसी को धोखा दे रहा था।
बेंटली से उतरते ही उसकी चाल में जो रौब था, वो देखते ही बनता था। प्यार, झूठ और धोखा के बीच जब वो अंदर आया तो सबकी साँसें रुक गईं। ऊपर बालकनी से सब उसे घूर रहे थे, जैसे कोई राजा आया हो। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जो बता रही थी कि वो यहाँ कुछ बड़ा करने आया है।
वो लाल साड़ी वाली लड़की सबसे अलग थी। जब सब पैसे के पीछे पागल हो रहे थे, वो बस मुस्कुरा रही थी। प्यार, झूठ और धोखा के इस खेल में उसकी आँखों में एक चालाकी थी। शायद वो जानती थी कि ये सब उसके लिए ही रचा गया था। उसकी हर अदा में एक रहस्य छुपा था।
शुरुआत में वो बहुत मासूम लग रही थी, लेकिन जब पैसे गिरे तो उसका असली चेहरा सामने आ गया। प्यार, झूठ और धोखा के इस नाटक में वो सबसे आगे थी। पैसे समेटते हुए उसकी आँखों में लालच साफ दिख रहा था। शायद वो भी इस खेल का एक अहम हिस्सा थी।
सजावट, रोशनी, क्रिसमस ट्री - सब कुछ परफेक्ट था, लेकिन प्यार, झूठ और धोखा का खेल चल रहा था। जब नोट गिरे तो सबका असली रंग सामने आ गया। ये कोई साधारण पार्टी नहीं थी, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। हर कोई किसी न किसी के खिलाफ खेल रहा था।