सीमा कुमार की महारानी वाली चाल देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सिंहासन पर बैठकर जब वो हुक्मनामा पढ़ रही थीं, तो लगा सच में सूर्य देश की असली मालिक वही हैं। नौ लोकों के देवता में इतनी शक्तिशाली पात्र कम ही देखने को मिलते हैं। उनकी आँखों में जो गुस्सा था, वो किसी से छिपा नहीं। काश ये दृश्य सिनेमाघर में देखने को मिलता। बहुत भव्य लग रहा था।
काले कवच वाली योद्धा का आगमन दृश्य जबरदस्त था। जैसे ही वो दरबार में आई, सबकी सांसें रुक गईं। उसका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वो आसान नहीं है। नौ लोकों के देवता की कहानी में अब ये नया मोड़ आया है। तलवार निकालते ही पता चल गया कि खतरा बढ़ने वाला है। ऐसे युद्ध के दृश्य बारबार देखने का मन करता है। शानदार प्रस्तुति।
आदित्य शर्मा की आँखों पर पट्टी क्यों है? ये सवाल हर दृश्य के बाद और बढ़ रहा है। सूरज शर्मा के सामने जब वो खड़ा था, तो कुछ अलग ही ऊर्जा महसूस हुई। नौ लोकों के देवता में इस रहस्य को सुलझाने के लिए हम बेताब हैं। सफेद पोशाक में वो किसी देवता से कम नहीं लग रहे। बस यही जानना है कि आखिर हुआ क्या था। रहस्य बना हुआ है।
लाल पोशाक वाले अधिकारी का हाल देखकर हैरानी भी हुई और डर भी। जब हुक्मनामा सुनाया, तो लगा सब ठीक है, पर अचानक वो पीछे गिर गया। नौ लोकों के देवता में ऐसे मोड़ ही तो मज़ा देते हैं। शायद आदित्य की शक्तियाँ जाग चुकी हैं। अधिकारी की घबराहट साफ़ दिख रही थी स्क्रीन पर। ये जादूई दुनिया बहुत रोचक लग रही है।
सूरज शर्मा के चेहरे पर चिंता साफ़ झलक रही थी। जब अधिकारी गिरा, तो उनकी नज़रें सीधे अपने बेटे पर थीं। नौ लोकों के देवता में पिता और पुत्र का ये रिश्ता बहुत गहरा लग रहा है। काले वस्त्रों में वो बहुत प्रभावशाली लग रहे हैं। लगता है परिवार पर कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है। हर भाव में दर्द छिपा था।
गुलाबी फूलों वाले बगीचे का दृश्य बहुत सुंदर था, पर माहौल में तनाव था। हल्के हरे कपड़ों वाली युवती डरी हुई लग रही थी। नौ लोकों के देवता में रोमांस और डर का ये मिश्रण अच्छा लगा। जब हवा चली और पंखुड़ियां गिरीं, तो लगा कुछ बड़ा होने वाला है। ऐसे दृश्य देखकर मन शांत हो जाता है, फिर अचानक डर लगता है।
हुक्मनामा पढ़ते वक्त जो चमत्कार हुआ, वो सबसे बेहतरीन दृश्य था। बिना छुए अधिकारी को धक्का लगा, ये कैसे हुआ? नौ लोकों के देवता में जादू की शक्तियाँ अब सामने आ रही हैं। आदित्य शर्मा की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। ऐसे दृश्यों के लिए ही तो हम ये कार्यक्रम देखते हैं। अगले भाग का इंतज़ार नहीं हो रहा।
महारानी सीमा कुमार और कवच वाली महिला में क्या दुश्मनी है? दोनों की आँखों में आग थी। नौ लोकों के देवता में ये टकराव बहुत बड़ा होने वाला है। काले और सुनहरे रंगों का इस्तेमाल बहुत शानदार है। जब वो आमने सामने आईं, तो लगा युद्ध शुरू हो गया। पोशाक बनाने वाले को सलाम करना पड़ेगा। हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है।
सफेद पट्टी बांधे हुए नायक की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। जब अधिकारी ने गलतफहमी की, तो सजा मिली। नौ लोकों के देवता में न्याय का ये रूप बहुत अलग है। सूरज शर्मा भी कुछ बोल नहीं पा रहे थे। लगता है नियमों के खिलाफ कोई नहीं जा सकता। ये दृश्य दिमाग में बैठ गया है। बारबार वही पल याद आ रहा है।
पूरा भाग देखकर बस यही कहना है कि कहानी बहुत गहरी है। हर किरदार अपने आप में एक पहेली है। नौ लोकों के देवता ने फिर से साबित कर दिया कि वो अद्वितीय है। यहाँ देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। अब बस ये जानना है कि आदित्य की आँखें कब खुलेंगी। ऐसे रहस्य के साथ ही कहानी आगे बढ़नी चाहिए। दर्शकों के लिए ये तोहफा है।