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आज़ाद परिंदेवां7एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

पार्टी का असली चेहरा

शुरुआत में पार्टी का माहौल बहुत ही शानदार लग रहा था जब विक्रम मल्होत्रा ने अपनी ताकत दिखाई। शर्मा भवन की सजावट देखकर लगता है कि यह कोई बड़ा कारोबारी मिलन है। हरी पोशाक वाली महिला के अंदाज में एक अलग ही नशा है जो सिगार पीते हुए दिखी। आज़ाद परिंदे के इस भाग में तनाव बढ़ता जा रहा है। उपहार डब्बा देने का तरीका बहुत ही अमीराना लगा मुझे। सब कुछ ठीक चल रहा था तक अचानक दृश्य बदल गया। कमरे में लाल रोशनी का इस्तेमाल बहुत ही डरावना माहौल बना रहा है। यह दृश्य बहुत ही रोमांचक है।

उपहार के पीछे का राज

विक्रम मल्होत्रा का किरदार बहुत ही घमंडी लग रहा है जब वह जेब से उपहार निकालता है। हरी पोशाक वाली महिला ने उसे स्वीकार किया लेकिन उसकी आँखों में कुछ और ही चमक थी। आज़ाद परिंदे की कहानी में यह मोड़ बहुत ही अप्रत्याशित था। जब हमने देखा कि एक लड़की रिबन से बंधी हुई है तो साँसें रुक गईं। पीछे बड़ा चित्र बहुत ही अजीब लग रहा था। यह दृश्य बताता है कि पार्टी के पीछे कोई गहरा राज छिपा है। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है।

बंधी हुई लड़की का दर्द

उस कमरे का नज़ारा देखकर रोंगटे खड़े हो गए जहाँ लड़की को आँखों पर पट्टी बांधकर खड़ा किया गया था। विक्रम मल्होत्रा के चेहरे पर जो मुस्कान थी वह बहुत ही खतरनाक लग रही थी। आज़ाद परिंदे में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी बहुत गहरी है। हरी पोशाक वाली महिला भी इस सब में शामिल लग रही है। जब वह शराब का गिलास लेकर बात करती है तो लगता है कि वह सब कुछ जानती है। यह तनाव मुझे बांधे रखता है।

नायक की धमाकेदार एंट्री

अचानक एक नया किरदार प्रवेश करता है और विक्रम को पंच मार देता है। यह संघर्ष दृश्य बहुत ही जोरदार था और सबको हैरान कर दिया। आज़ाद परिंदे के इस भाग में मारपीट और नाटक दोनों का अच्छा मिश्रण है। लड़की जो बंधी हुई थी वह अब सुरक्षित लग रही है जब वह लड़का उसके पास आता है। कमरे की रोशनी बहुत ही दृश्यात्मक थी जो लाल रंग में चमक रही थी। मुझे यह मोड़ बहुत पसंद आया क्योंकि नायक का प्रवेश धमाकेदार हुआ।

पैसा और इंसानियत

शर्मा भवन की पार्टी में सब कुछ इतना अच्छा चल रहा था कि किसी को शक नहीं हुआ। विक्रम मल्होत्रा जैसे अमीर कारोबारी का व्यवहार बहुत ही अजीब था जब वह उस कमरे में गया। आज़ाद परिंदे की कहानी में यह दिखाता है कि पैसा इंसान को कैसे बदल देता है। हरी पोशाक वाली महिला की खामोशी बहुत कुछ कह रही थी। जब लड़की को बंधा हुआ देखा तो गुस्सा आया। नायक के प्रवेश ने सबका समीकरण बदल दिया। यह दृश्य बहुत ही यादगार बन गया है।

खतरनाक मुस्कान

चित्र के सामने खड़ी लड़की की हालत देखकर बहुत बुरा लगा जो आँखों पर पट्टी थी। विक्रम मल्होत्रा का इरादा साफ़ दिख रहा था जब वह हँस रहा था। आज़ाद परिंदे में ऐसे दृश्य दर्शकों को झकझोर देते हैं। हरी पोशाक वाली महिला ने उपहार लेते समय जो मुस्कान दी वह बहुत ही रहस्यमयी थी। कमरे में लाल रोशनी का इस्तेमाल खतरे का संकेत दे रहा था। जब नायक ने वार किया तो सबकी नींद खुल गई। यह नाटक बहुत ही तीव्र है।

रहस्यमयी महिला

विक्रम मल्होत्रा ने जब उपहार डब्बा खोला तो उसमें घड़ी थी जो बहुत महंगी लग रही थी। हरी पोशाक वाली महिला ने उसे ले लिया लेकिन उसका ध्यान किसी और चीज़ पर था। आज़ाद परिंदे के इस भाग में हर किरदार का अपना राज है। जब हम उस कमरे में पहुँचे तो माहौल पूरी तरह बदल चुका था। लड़की को रिबन से बांधना बहुत ही क्रूरतापूर्ण लगा। नायक के प्रवेश ने सबको चौंका दिया। यह कहानी बहुत आगे जाने वाली है।

संघर्ष का शानदार दृश्य

शुरुआत में शराब की बोतलें देखकर लगा कि यह सिर्फ एक पार्टी है। लेकिन विक्रम मल्होत्रा के चेहरे के भाव बता रहे थे कि कुछ गड़बड़ है। आज़ाद परिंदे की कहानी में यह मोड़ बहुत ही शानदार था। हरी पोशाक वाली महिला का किरदार बहुत ही मजबूत लग रहा है। जब लड़की को बंधा हुआ देखा तो तनाव बढ़ गया। नायक ने आकर विक्रम को सबक सिखाया। यह दृश्य बहुत ही संघर्ष से भरा हुआ था। मुझे यह दृश्य बहुत पसंद आया।

खलनायक की हार

उस कमरे की सजावट बहुत ही अजीब थी जहाँ बड़ा चित्र लगा हुआ था। विक्रम मल्होत्रा की हँसी सुनकर लगता था कि वह जीत गया है। आज़ाद परिंदे में ऐसे खलनायक किरदार बहुत ही नफरत के लायक होते हैं। हरी पोशाक वाली महिला चुपचाप सब देख रही थी। लड़की की आँखों पर पट्टी थी और वह कुछ देख नहीं पा रही थी। नायक के प्रवेश ने सब कुछ बदल दिया। यह नाटक बहुत ही रोमांचक है और आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता है।

न्याय की जीत

अंत में जब नायक लड़की के पास खड़ा हुआ तो लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा। विक्रम मल्होत्रा जमीन पर गिर गया था जो उसकी हार थी। आज़ाद परिंदे के इस दृश्य में न्याय की जीत हुई है। हरी पोशाक वाली महिला अब क्या करेगी यह देखना बाकी है। कमरे की लाल रोशनी अब धीमी पड़ गई थी। यह भाग बहुत ही शानदार तरीके से खत्म हुआ। मुझे यह कार्यक्रम बहुत पसंद आ रहा है और मैं आगे का इंतज़ार कर रहा हूँ।