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आज़ाद परिंदेवां2एपिसोड

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आज़ाद परिंदे

अपनी चाची से बचने के लिए आदिति गैंगस्टर यश को फंसाती है। यश उसे अपने पास रोक लेता है। धीरे धीरे दोनों करीब आते हैं, लेकिन यश को अपने गैंग ने धोखा देकर समुद्र में फेंक दिया। आदिति विदेश चली जाती है, जहाँ उसकी मुलाकात याददाश्त खो चुके यश से होती है। वापस लौटने पर पता चलता है कि यश का भूलना एक नाटक था, वह सत्ता हथियाने की साजिश रच रहा था। आदिति भागने की कोशिश करती है, लेकिन यश उसे कैद कर लेता है और उसे पता चलता है कि वह गर्भवती है। क्या आदिति कभी आज़ाद हो पाएगी? क्या यश का प्यार कभी सच्चा था?
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इस एपिसोड की समीक्षा

चर्च का रहस्यमयी सीन

चर्च वाला सीन बहुत इंटेंस था और उसकी नज़रें कुछ और ही कहानी कह रही थीं। लेकिन घर आते ही सब बदल गया और प्रिया शर्मा का गुस्सा देखकर डर लग रहा है। स्कूल यूनिफॉर्म वाली अदिति बेचारी कितनी असहाय लग रही थी वहां। आज़ाद परिंदे की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत गहरा है और काश वह अपनी आवाज़ उठा पाए।

बेचारी अदिति की हालत

बैग का सामान ज़मीन पर गिराना बहुत बुरा लगा और नौकरानी भी बिना सोचे समझे ऐसा कर गई। प्रिया शर्मा की सत्ता सब पर छाई हुई है और कोड़े वाला सीन तो रोंगटे खड़े कर देने वाला था। आज़ाद परिंदे में इमोशनल ड्रामा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है और अदिति की आँखों में आँसू देखकर दिल दुखा।

काले कोट वाला शख्स

वह आदमी मुस्कुराते हुए आया जबकि अदिति रो रही थी और क्या वह भी दुश्मनों का साथ दे रहा है। प्रिया शर्मा के साथ उसकी नज़दीकियां शक पैदा करती हैं और आज़ाद परिंदे का प्लॉट बहुत पेचीदा होता जा रहा है। काले कोट में वह बहुत सुंदर लग रहा था पर व्यवहार अजीब था।

घर और चर्च का अंतर

सफेद चर्च और गहरे रंग का घर, दोनों का अंतर कमाल का था और प्रिया शर्मा का काला ड्रेस उसे शक्तिशाली दिखा रहा था। अदिति की मासूमियत सबके सामने कुचली जा रही थी और आज़ाद परिंदे का छायांकन बहुत शानदार है। हर फ्रेम में एक अलग तनाव महसूस हुई।

नौकरानी का रोल

नौकरानी का रोल भी बहुत अहम है इस कहानी में और वह भी मालकिन के इशारे पर चल रही थी। बेचारी छात्रा के पास कोई सहारा नहीं बचा है और प्रिया शर्मा का रूतबा सब पर भारी पड़ रहा है। आज़ाद परिंदे में वर्ग संघर्ष को बहुत अच्छे से दिखाया गया है।

आलीशान घर की सजावट

घर की सजावट बहुत आलीशान लग रही थी और प्रिया शर्मा की ज्वेलरी और ड्रेस बहुत महंगी थी। पर उसका दिल पत्थर का लग रहा था और अदिति ज़मीन पर गिर गई पर किसी को फर्क नहीं पड़ा। आज़ाद परिंदे का नाम ही इसकी कहानी को सही बता रहा है।

रिश्तों की उलझन

पहले वह उसे पकड़ता है फिर अनदेखा करता है और यह कैसा खेल चल रहा है। प्रिया शर्मा शायद उसे नियंत्रित कर रही है और आज़ाद परिंदे में रिश्तों की यह उलझन बहुत दिलचस्प है। क्या वह अदिति को बचा पाएगा या खुद खलनायक बन जाएगा।

मानसिक प्रताड़ना

अदिति की चीख सुनकर भी कोई नहीं रुका और प्रिया शर्मा ने कोठा उठाया तो डर लग गया। यह मानसिक प्रताड़ना बहुत गहरी है और आज़ाद परिंदे में अभिनय बहुत स्वाभाविक लगी। दर्शक के रूप में मैं बहुत निराश महसूस कर रहा हूं।

खलनायक का प्रभाव

अंत में दोनों साथ चलते हुए बहुत अजीब लग रहे थे और अदिति अकेले सोफे पर रह गई। प्रिया शर्मा की जीत हुई लग रही थी और आज़ाद परिंदे के खलनायक बहुत मजबूत हैं। क्या नायिका इतनी ताकतवर दुश्मनों से लड़ पाएगी।

नेटशॉर्ट पर बेहतरीन सीरीज

नेटशॉर्ट पर यह सीरीज देखना बहुत लत जैसा हो गया है और हर कड़ी में नया ट्विस्ट है। प्रिया शर्मा का किरदार यादगार बन गया है और आज़ाद परिंदे का अगला भाग कब आएगा इसका इंतज़ार है। कहानी में दम बहुत ज्यादा है।