उसका निषिद्ध कैदी में पुलिस अधिकारी और कैदी के बीच का तनाव देखकर रोंगटे खड़े हो गए। शुरुआत में जो सख्ती दिखी, वो बाद में एक अलग ही रूप ले लेती है। जब वो उसे गोद में उठाकर कमरे में ले जाता है, तो लगता है कि ये सिर्फ कर्तव्य नहीं, कुछ और ही है। पानी की बूंदों के बीच जो भावनात्मक लगाव दिखा, वो दिल को छू गया।
जब पुलिस वाला अपनी वर्दी उतारता है, तो असली कहानी शुरू होती है। उसका निषिद्ध कैदी का ये दृश्य जबरदस्त है जहाँ वो शावर के नीचे खड़े होकर एक दूसरे को देखते हैं। पसीना और पानी मिलकर एक नया माहौल बनाते हैं। ऐसा लगता है जैसे दोनों के बीच की दीवार टूट रही हो। बहुत ही गहरा और तीव्र दृश्य है।
जेल की सलाखों के पीछे भी इंसानियत जिंदा रहती है, ये उसका निषिद्ध कैदी ने बहुत खूबसूरती से दिखाया। जब वो पुलिस वाला उस कैदी लड़की को बचाता है, तो लगता है कि नियमों से ऊपर भी कुछ रिश्ते होते हैं। कमरे वाला दृश्य थोड़ा साहसिक था, लेकिन भावनात्मक लगाव बहुत मजबूत था।
उसका निषिद्ध कैदी में संवाद से ज्यादा आँखों ने बात की। जब वो लड़की रो रही थी और वो पुलिस वाला उसे देख रहा था, तो बिना कुछ कहे सब समझ आ गया। शावर वाले दृश्य में जब पानी उनकी आँखों से टकराता है, तो वो दर्द और उम्मीद दोनों दिखाता है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा।
अक्सर पुलिस को सख्त दिखाया जाता है, लेकिन उसका निषिद्ध कैदी में एक अलग ही पहलू दिखा। जब वो अपनी वर्दी उतारकर उसे गले लगाता है, तो लगता है कि इंसानियत अभी मरी नहीं है। जेल के माहौल में ये कोमल पल बहुत खास लगा। पृष्ठभूमि संगीत भी बहुत सही था।
उसका निषिद्ध कैदी का शावर दृश्य सिर्फ प्रेम नहीं, एक तरह की शुद्धि भी है। जब पानी उनके शरीर से बहता है, तो लगता है कि पुराने गिले-शिकवे भी बह रहे हैं। वो लड़की जो डरी हुई थी, अब सहारा महसूस कर रही है। ये संक्रमण बहुत ही सहज और भावनात्मक था।
उसका निषिद्ध कैदी में जब वो लड़की की फटी हुई वर्दी दिखाई देती है, तो दर्द महसूस होता है। लेकिन जब वही पुलिस वाला उसे अपनी वर्दी ओढ़ाता है, तो लगता है कि वो उसे सुरक्षा दे रहा है। ये प्रतीकात्मकता बहुत गहरी थी। दो अलग दुनिया के लोग एक दूसरे के करीब आ रहे हैं।
उसका निषिद्ध कैदी के कुछ दृश्यों में संवाद की जरूरत ही नहीं पड़ी। जब वो दोनों शावर के नीचे खड़े होकर एक दूसरे की साँसों को महसूस करते हैं, तो वो पल बहुत अंतरंग लगता है। पसीना और पानी मिलकर एक नया एहसास बनाते हैं। ये दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा।
उसका निषिद्ध कैदी में ये सवाल हमेशा बना रहता है कि क्या ये रिश्ता सही है या गलत। जब पुलिस वाला अपने ही साथी के खिलाफ जाकर उस कैदी को बचाता है, तो लगता है कि प्यार कानून से ऊपर है। ये नैतिक दुविधा बहुत रोचक थी। कहानी में गहराई है।
उसका निषिद्ध कैदी का ये अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत लगती है। जब वो दोनों शावर के नीचे एक दूसरे को गले लगाते हैं, तो लगता है कि अब कुछ भी उन्हें अलग नहीं कर सकता। जेल की दीवारें अब मायने नहीं रखतीं। बहुत ही शक्तिशाली चरमोत्कर्ष था।
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