जेल की वो गंदगी और हिंसा देखकर रूह कांप गई, लेकिन उस पुलिस वाले की आंखों में एक अलग ही दर्द था। उसके निषिद्ध कैदी में जब वो घायल कैदी के घाव साफ करता है, तो लगता है जैसे वो सिर्फ कर्तव्य नहीं निभा रहा, बल्कि किसी पुराने वादे को पूरा कर रहा हो। उस लड़की की आंखों में डर और फिर थोड़ी राहत देखकर समझ आया कि इंसानियत अभी मरी नहीं है।
शुरुआत में लगा ये पुलिस वाला भी बाकी जैसे ही क्रूर है, पर उसके निषिद्ध कैदी ने पूरा खेल बदल दिया। जब उसने दवाओं के सामान से दवाइयां निकालीं और उस मासूम चेहरे पर पट्टी बांधी, तो सारा गुस्सा प्यार में बदल गया। वो खूनी रूमाल देखकर तो बस रोना आ गया, शायद वो उसके लिए ही रो रही थी जो उसे बचा नहीं पाया।
उसके निषिद्ध कैदी का ये दृश्य दिल दहला देने वाला था। जेलर की बर्बरता और फिर उस अफसर का नरम रवैया, दोनों के बीच का अंतर कमाल का था। उस लड़की की चीखें खामोश थीं लेकिन उसकी आंखें सब कुछ बता रही थीं। जब वो अफसर उसके पास बैठता है, तो लगता है जैसे वक्त थम गया हो। क्या वो उसे बाहर निकाल पाएगा?
उसके निषिद्ध कैदी में वो आखिरी दृश्य जबरदस्त था जब लड़की ने खूनी रूमाल देखा। उस पट्टी पर लगा खून सिर्फ जख्म नहीं, बल्कि उसके टूटे हुए भरोसे का सबूत था। पुलिस वाले के चेहरे पर वो गंभीरता बता रही थी कि वो मामले को गंभीरता से ले रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर बहादुरी की नई परिभाषा समझ आती है।
क्या ये सिर्फ कर्तव्य है या कुछ और? उसके निषिद्ध कैदी में जब वो अफसर उस कैदी के बालों को सहलाता है, तो माहौल में एक अजीब सी गर्माहट आ जाती है। जेल की सलाखों के बीच ये रिश्ता कैसे पलेगा, ये देखना दिलचस्प होगा। उस लड़की की मुस्कान टूटी हुई थी पर उसमें भी एक उम्मीद थी।
उसके निषिद्ध कैदी की कहानी में गहराई है। जेलर का व्यवहार इतना क्रूर क्यों था? क्या ये सब किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? जब मुख्य अफसर दखल देता है, तो लगता है कि अब खेल बदलेगा। उस लड़की की हालत देखकर गुस्सा आता है, पर अफसर की परवाह देखकर राहत भी मिलती है। रोचक मोड़ जबरदस्त था!
उसके निषिद्ध कैदी में दिखाया गया दर्द असली लगता है। उस लड़की के आंसू और फिर खून देखकर दिल भारी हो गया। पुलिस वाले का किरदार इतना जटिल है कि समझ नहीं आता वो खलनायक है या नायक। जब वो दरवाजा बंद करके जाता है, तो लगता है जैसे उसने अपने दिल का दरवाजा भी बंद कर लिया हो। क्या वो वापस आएगा?
जेल जैसे नर्क में भी कोई फरिश्ता हो सकता है, ये उसके निषिद्ध कैदी ने साबित कर दिया। उस अफसर का नाम सुलान्पी था या जेन्सन, पर उसका काम किसी मसीहा जैसा था। उसने न सिर्फ मरहम लगाया बल्कि उस टूटी हुई आत्मा को सहारा दिया। नेटशॉर्ट पर ऐसी सामग्री की कमी है जो दिल को छू जाए।
उसके निषिद्ध कैदी में वो दीवारें भी गवाह हैं जो सब देख रही हैं। जब पुलिस वाले दूसरे कैदियों को ले जाते हैं और सिर्फ उसे छोड़ देते हैं, तो साफ है कि उसके साथ कुछ खास होने वाला है। उसकी आंखों में डर था पर अफसर की आंखों में वादा था। ये जोड़ी पर्दे पर आग लगा देगी।
अंधेरे में भी रोशनी होती है, बस देखने वाले की नजर चाहिए। उसके निषिद्ध कैदी में वो पुलिस वाला उस लड़की के लिए रोशनी बनकर आया। जब उसने पट्टी बांधी और धीरे से बात की, तो लगा जैसे जेल की सलाखें पिघल गई हों। उस खूनी रूमाल ने शायद नई कहानी की शुरुआत की है। कौन जानता है आगे क्या होगा?
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