सुनहरी पोशाक में वह किसी परी से कम नहीं लग रही थी, लेकिन उनकी आँखों में छिपा दर्द साफ़ दिख रहा था। जब उसने उसका हाथ थामा, तो लगा जैसे समय थम गया हो। इस कार्यक्रम की कहानी में जो गहराई है, वह सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल जैसे नाम को सार्थक करती है। हर दृश्य में एक नया राज़ छिपा है जो दर्शकों को बांधे रखता है। अभिनय बहुत शानदार है। मुझे यह बहुत पसंद आया।
कार्यालय वाले दृश्य में जो तनाव था, वह शादी की पार्टी से बिल्कुल अलग था। ग्रे सूट वाला शख्सियत इतना प्रभावशाली था कि सामने वाली की सांसें रुक गईं। दराज खोलने का वो पल किसी रहस्य के खुलने जैसा था। इस श्रृंखला का हर मोड़ नया है और सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल देखने का अनुभव बहुत रोमांचक रहा है। मुझे यह शैली पसंद आया। कहानी बहुत रोचक है।
उनकी आँखों की भाषा ही सब कुछ कह रही थी, बिना एक शब्द बोले। वह उसे देख रही थी जैसे कोई सवाल पूछ रही हो, और वह मुस्कुरा रहा था जैसे कोई जवाब छिपा रहा हो। यह जो खामोशी है न, यह शोर से ज्यादा तेज है। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में ऐसे ही पल बार-बार देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं। सच में बहुत भावनात्मक है। दिल को छू गया।
बाहर की चमक धमक के पीछे छिपे असली जज़्बात को कैमरे ने बहुत बारीकी से पकड़ा है। गहने भारी थे पर उनकी जिम्मेदारियां उससे भी ज्यादा भारी लग रही थीं। जब वह पीछे मुड़ी, तो लगा कहानी में बड़ा मोड़ आने वाला है। इस नाटक की गहराई ने मुझे हैरान कर दिया है और सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल सच में अनोखा है। विशेष प्रभाव भी अच्छे हैं। दृश्य सुंदर हैं।
पार्टी की रोशनी में उनकी मुलाकात किसी सपने जैसी लग रही थी, पर हकीकत कुछ और ही थी। उसने जब गले का पट्टा ठीक किया, तो लगा वह किसी कार्य पर निकलने वाला है। कार्यालय और पार्टी के बीच का संबंध बहुत दिलचस्प है। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की कहानी में जो गहराई है, वह आम नाटकों में नहीं मिलती। कहानी बहुत मजबूत है। बजट भी अच्छा लग रहा है।
वह बार-बार उसकी ओर देख रही थी, जैसे कोई उम्मीद बाकी हो। उसकी पकड़ मजबूत थी, पर उसका दिल कहीं और था। यह जो खिंचाव है न, यह सबसे खतरनाक होता है। इस कार्यक्रम में दिखाए गए रिश्तों की जटिलता ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल देखकर लगता है कि प्यार और सत्ता का खेल कभी नहीं रुकता। बहुत गहरा है। रिश्ते जटिल हैं।
दृश्य की शुरुआत शांत थी, लेकिन धीरे धीरे तनाव बढ़ता गया। जब उसने दराज का कब्जा पकड़ा, तो पर्दे पर सन्नाटा छा गया। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता है हम वहां मौजूद हैं। इस श्रृंखला की हर कड़ी एक नया रहस्य लेकर आती है। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल का नाम सुनकर ही लगता है कि कुछ खास होने वाला है। मज़ा आ गया। अगली कड़ी का इंतज़ार है।
कपड़ों की सजावट और सेट की सजावट दोनों ही लाजवाब हैं, पर असली खूबसूरती उनके भावों में थी। वह घबराई हुई थी, पर खुद को संभाले हुए थी। ऐसे किरदार निभाना आसान नहीं होता। इस कार्यक्रम का निर्माण गुणवत्ता बहुत उत्कृष्ट है और सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल जैसे शीर्षक के साथ यह बहुत जच रहा है। निर्देशन भी बढ़िया है। कलाकारों ने मेहनत की है।
दो अलग अलग जगहों पर दो अलग अलग मूड, पर कहानी एक ही धागे से बंधी हुई है। कार्यालय की ठंडक और पार्टी की गर्माहट दोनों में वही तनाव है। यह जो कहानी का बुनावट है, यह बहुत मजबूत है। मुझे इस कार्यक्रम का हर पल पसंद आया और सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल ने मेरी उम्मीदों पर खरा उतरा है। बहुत ही शानदार श्रृंखला है। सबको पसंद आएगी।
आखिरी दृश्य में उसकी आँखों में जो सवाल था, वह पूरे दृश्य का निचोड़ था। क्या वह सच जानना चाहती है या सच से डर रही है? यह द्वंद्व बहुत गहरा है। इस नाटक ने मुझे रात भर जागे रहने पर मजबूर कर दिया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की कहानी में जो जादू है, वह आसानी से नहीं भुलाया जा सकता। सबको देखना चाहिए। मेरी तरफ से पांच सितारे।