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CEO का इच्छा का अनोखा खेलवां50एपिसोड

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CEO का इच्छा का अनोखा खेल

अपने पिता द्वारा एक विकृत व्यक्ति को बेचे जाने से बचने के लिए, बर्बाद वारिस मेलोडी एक सुंदर अजनबी को अपना कौमार्य दे देती है – केवल यह जानने के लिए कि वह अगस्त है, एक उद्योगपति और उसके पूर्व प्रेमी के चाचा। अब वह उसका अपना जुनून बन चुकी है। उस पर एक वर्जित सजा लागू है: पहनना है एक छिपा हुआ सुख उपकरण जबकि वह रिमोट अपने पास रखता है। नियंत्रण के इस खेल में, वह उसे छूने वाले किसी भी व्यक्ति को नष्ट कर देगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल में हाई वोल्टेज ड्रामा

इस दृश्य में तनाव इतना बढ़ गया था कि सांस रुक जाती है। अस्पताल का मरीज बंदूक छोड़ देता है और फिर भी चाकू वाला शख्स नहीं रुकता। पुलिस का प्रवेश और फिर अचानक गोली चलना, सब कुछ बहुत तेज था। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल देखकर लगता है कि हर कड़ी में नया मोड़ है। अभिनय बहुत दमदार लगा मुझे।

बंधक बनकर भी हिम्मत नहीं हारी

लड़की की आंखों में डर साफ दिख रहा था, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। चाकू गले पर था लेकिन उसकी नजरें उम्मीद ढूंढ रही थीं। जब मरीज ने हथियार नीचे गिराया, तो लगा सब खत्म हो गया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की कहानी में ऐसे मोड़ बारबार दिल दहला देते हैं। अंत में गले मिलना बहुत भावुक था।

खलनायक की हंसी ने डरा दिया

चाकू पकड़े शख्स की हंसी और चेहरे के भाव देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसे लगा वह जीत गया है, लेकिन पुलिस वाले की निशानेबाजी कमाल की थी। माथे पर गोली लगते ही उसकी सूरत बदल गई। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में खलनायक भी बहुत यादगार हैं। ऐसे दृश्य बारबार देखने को मन करता है।

पुलिस की एंट्री थी धमाकेदार

जब पुलिस वाले ने घुटने टेककर निशाना लगाया, तो लगा अब नायक जीतेंगे। बिना किसी संवाद के सिर्फ कार्रवाई से सब साफ हो गया। बंदूक जमीन पर गिरते ही माहौल बदल गया। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में कार्रवाई दृश्यों की प्रस्तुति बहुत अच्छी है। हर दृश्य में जान है।

इमोशनल हग ने रुला दिया

गोली चलने के बाद जब मरीज ने लड़की को गले लगाया, तो आंखें नम हो गईं। इतने तनाव के बाद यह राहत बहुत जरूरी थी। दोनों के चेहरे पर राहत साफ दिख रही थी। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में प्रेम और नाटक का मिश्रण बहुत प्यारा है। यह पल हमेशा याद रहेगा।

सरप्राइज एंडिंग थी बेमिसाल

लगा था कि चाकू वाला शख्स भाग जाएगा, लेकिन अंत ऐसा होगा किसी ने नहीं सोचा था। माथे पर निशाना लगना और खून के छींटे, सब कुछ असली लगा। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की पटकथा बहुत मजबूत है। ऐसे मोड़ ही कार्यक्रम को खास बनाते हैं। मुझे बहुत पसंद आया।

हॉस्पिटल सेटिंग थी परफेक्ट

शल्य कक्ष की रोशनी और ठंडा माहौल इस नाटक को और भी तनावपूर्ण बना रहा था। सफेद कपड़े और नीली पोशाक में विरोधाभास बहुत अच्छा लगा। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में लोकेशन का इस्तेमाल बहुत समझदारी से हुआ है। हर जगह खतरा महसूस होता है।

हीरो का फैसला था बहादुरी वाला

भले ही उसके पास बंदूक थी, लेकिन उसने जान बचाने के लिए हथियार नीचे रख दिया। यह दिखाता है कि वह सिर्फ ताकत नहीं, दिल का भी साफ है। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। ऐसे नायक को सलाम करना बनता है।

नेटशॉर्ट पर देखने का मजा आया

दूरभाष पर इतने उत्कृष्ट गुणवत्ता दृश्य देखकर हैरानी हुई। स्पष्टता और ध्वनि प्रभाव बहुत बढ़िया थे। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल जैसे कार्यक्रम देखने के लिए यह मंच सर्वश्रेष्ठ है। बिना रुके कई कड़ियां देख डाले मैंने। गुणवत्ता देखकर मन भर नहीं रहा था।

हर सीन में नया सस्पेंस

शुरू से लेकर अंत तक बोर होने का मौका नहीं मिला। कब क्या होगा यह अंदाजा नहीं लग रहा था। चाकू, बंदूक और पुलिस सब कुछ था। सीईओ का इच्छा का अनोखा खेल की रफ्तार बहुत तेज है। जो लोग रोमांचक पसंद करते हैं उनके लिए यह उत्कृष्ट है। हर पल रोमांचक था।