शुरुआत में वह इतनी घमंडी और बेपरवाह लग रही थी, जैसे उसे किसी की परवाह ही न हो। लेकिन जब किचन में वह कप गिरा तो उसके चेहरे पर जो डर और झटका दिखा, वह असली था। प्यार, झूठ और धोखा के इस नाटक में यह मोड़ बहुत जरूरी था क्योंकि यह दिखाता है कि बाहर से मजबूत दिखने वाले लोग अंदर से कितने कमजोर हो सकते हैं। उसकी आवाज का कांपना सब कुछ बता गया।
जब उसने कप तोड़ा, तो सिर्फ मिट्टी के बर्तन नहीं टूटे, बल्कि उस पूरे झूठ का बुलबुला फट गया जो उस घर में पला था। बेज सूट वाले का वह शांत तरीके से चाय पीना और फिर अचानक कप गिराना एक संकेत था कि अब सब कुछ बदलने वाला है। प्यार, झूठ और धोखा की इस कहानी में यह दृश्य सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं से असली खेल शुरू होता है जहां नकाब उतरने वाले हैं।
उस टेबल पर बैठे हर व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग भाव था। कोई शराब की बोतल पकड़े हंस रहा था, तो कोई सोफे पर लेटकर मजाक उड़ा रहा था। लेकिन जैसे ही वह आदमी आया, सबके चेहरे बदल गए। प्यार, झूठ और धोखा की इस कहानी में यह दिखाया गया है कि कैसे एक गलत फैसला पूरे परिवार या दोस्तों के समूह को कैसे तोड़ सकता है। हर किसी की आंखों में छिपा डर साफ दिख रहा था।
इस शो की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बिना किसी फालतू डायलॉग के सीधे मुद्दे पर आता है। नेटशॉर्ट ऐप पर इसे देखते वक्त लगा कि मैं उसी कमरे में खड़ा हूं और उस तनाव को महसूस कर रहा हूं। प्यार, झूठ और धोखा की यह कहानी इतनी रियलिस्टिक है कि कभी-कभी लगता है कि यह हमारे अपने आस-पास ही चल रहा है। एक्टिंग और सेट डिजाइन दोनों ही लाजवाब हैं जो दर्शक को बांधे रखते हैं।
वह चश्मा पहने आदमी शुरू से ही कुछ ज्यादा ही कॉन्फिडेंट लग रहा था, जैसे उसे सब कुछ पता हो। लेकिन जब बात गंभीर हुई तो उसका वह घमंड टूट गया। प्यार, झूठ और धोखा की इस कहानी में उसका किरदार बहुत अहम है क्योंकि वह वह कड़ी है जो सबको जोड़े रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन असल में वह खुद ही सबको उलझा रहा है। उसकी आवाज में जो नर्वसनेस थी वह गजब की थी।