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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां53एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्ची की चुप्पी ने सबको हिला दिया

जब वो छोटी सी लड़की बिना कुछ बोले बैठी रही, तो लगा जैसे पूरा गाँव रुक गया हो। उसके आँखों में दर्द था, पर वो रोई नहीं। बड़े लोग बातें करते रहे, पर उसकी चुप्पी सबसे ज़्यादा बोल रही थी। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे पल ही तो दिल छू लेते हैं। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उसी बांस के झुरमुट में बैठी हूँ, साँस रोके।

बच्ची की चुप्पी ने सबका दिल तोड़ दिया

जब वह छोटी सी लड़की बिना कुछ कहे बैठी रही, तो लगा जैसे पूरी दुनिया रुक गई हो। उसके आँखों में दर्द था, पर वो रोई नहीं। बड़े लोग हँस रहे थे, पर उसकी चुप्पी सबके चेहरे पर सवाल छोड़ गई। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे पल ही तो जान डालते हैं। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा कि कभी-कभी सबसे तेज़ आवाज़ वो होती है जो नहीं निकलती।