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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां45एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्ची की आँखों में डर और हिम्मत दोनों

जब वो छोटी बच्ची अपने पिता को मारते देखती है, तो उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी हिम्मत दिखती है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे दृश्य दिल को छू लेते हैं। लाल पोशाक वाली महिला का गुस्सा और बूढ़े आदमी का दर्द — सब कुछ इतना तीव्र है कि सांस रुक जाए। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस कमरे में खड़ी हूँ, चिल्लाना चाहती हूँ पर आवाज़ नहीं निकल रही।

बच्ची की आँखों में डर और हिम्मत दोनों

जब वो छोटी बच्ची अपने पिता को मारते देखती है, तो उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी हिम्मत दिखती है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे दृश्य दिल को छू लेते हैं। लाल पोशाक वाली महिला का गुस्सा और बूढ़े आदमी का दर्द — सब कुछ इतना तीव्र है कि सांस रुक जाए। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस कमरे में खड़ी हूँ, बच्चों को बचाने के लिए कुछ कर सकती हूँ।