जब वो छोटी बच्ची अपने पिता को मारते देखती है, तो उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी हिम्मत दिखती है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे दृश्य दिल को छू लेते हैं। लाल पोशाक वाली महिला का गुस्सा और बूढ़े आदमी का दर्द — सब कुछ इतना तीव्र है कि सांस रुक जाए। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस कमरे में खड़ी हूँ, चिल्लाना चाहती हूँ पर आवाज़ नहीं निकल रही।
जब वो छोटी बच्ची अपने पिता को मारते देखती है, तो उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी हिम्मत दिखती है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे दृश्य दिल को छू लेते हैं। लाल पोशाक वाली महिला का गुस्सा और बूढ़े आदमी का दर्द — सब कुछ इतना तीव्र है कि सांस रुक जाए। नेटशॉर्ट पर देखते वक्त लगा जैसे मैं भी उस कमरे में खड़ी हूँ, बच्चों को बचाने के लिए कुछ कर सकती हूँ।