आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में छोटी बच्ची का सिस्टम से बातचीत करना और फिर सुरक्षित गुफा का प्रकट होना देखकर मन में उत्साह भर गया। बच्चों की मासूमियत और वयस्कों की चिंता का अंतर बहुत गहराई से दिखाया गया है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखते समय लगा जैसे खुद उस भीड़ में खड़े हों। भावनात्मक तनाव और तकनीकी तत्व का मेल अद्भुत है।
आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में छोटी बच्ची की मासूमियत और सिस्टम के साथ उसका अद्भुत संवाद दिल को छू लेता है। जब वह भूखे लोगों के बीच खड़ी होती है और सिस्टम से मदद मांगती है, तो लगता है जैसे कोई देवता उसकी पुकार सुन रहा हो। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखकर लगा कि बच्चों की आँखों में उम्मीद की चमक कभी नहीं बुझती।