PreviousLater
Close

आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां32एपिसोड

like2.1Kchase1.5K

आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

रात के डर से सुबह की उम्मीद तक

इस दृश्य में रात का नीला रंग और डर का माहौल इतना गहरा है कि दिल धड़कने लगता है। जब लड़की जमीन पर गिरती है और उसकी आँखों में आंसू होते हैं, तो लगता है जैसे आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह मिल गई हो। फिर सुबह का उजाला और परिवार का मिलन देखकर राहत मिलती है। बूढ़े आदमी का रोना और युवक का मुस्कुराना भावनाओं का सही संतुलन है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना सच में दिल को छू लेता है।

रात के डर से सुबह की उम्मीद तक

इस दृश्य में रात का माहौल इतना डरावना है कि दिल धड़कने लगता है। एक छोटी बच्ची जमीन पर गिरी हुई है और चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ है। फिर अचानक सुबह होती है और सब कुछ बदल जाता है। लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, गले लगते हैं और खुशी से भर जाते हैं। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह वाली कहानी में यह बदलाव बहुत ही भावुक कर देने वाला है। बच्ची की मासूमियत और बड़ों की चिंता दोनों ही दिल को छू लेती हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना एक अलग ही अनुभव है।