जब वह बूढ़ा आदमी रस्सी से बंधा चिल्ला रहा था, तो सबकी नज़रें उस पर थीं, लेकिन मैंने देखा—वह छोटी बच्ची, जिसके आँसू आँखों में जमे थे, वो असली हीरोइन है। उसकी चुप्पी में इतना दर्द था कि दिल दहल गया। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे पल ही तो कहानी को जीवंत बनाते हैं। उसकी उंगलियाँ कांप रही थीं, फिर भी वह किसी को नहीं रोकी—शायद वो जानती थी कि ये सब कुछ उसकी किस्मत का हिस्सा है।
जब वो बूढ़ा आदमी रस्सी से बंधा चीख रहा था, तो सबकी नज़रें उस पर थीं, पर मेरी नज़र उस छोटी बच्ची पर थी जो चुपचाप सब देख रही थी। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी समझदारी थी। जब उसने उस आदमी के हाथ को पकड़ा, तो लगा जैसे वो उसे बचाने नहीं, बल्कि कुछ और ही करने वाली हो। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसे मोड़ आते हैं जो दिल दहला देते हैं। उस बच्ची के चेहरे पर जो भाव थे, वो किसी बच्चे के नहीं थे। शायद वो जानती थी कि आगे क्या होने वाला है। जब उस महिला ने उसे रोका, तो लगा जैसे कोई पुराना राज़ खुलने वाला हो। ये दृश्य इतना तनावपूर्ण था कि साँस रुक गई।