जब आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह, तो इस नाटक ने दिल छू लिया। छोटी बच्ची की मासूमियत और उसकी आँखों में छुपी चालाकी देखकर हैरानी हुई। रात के दृश्य में तनाव इतना था कि साँस रुक गई। पात्रों के बीच का संवाद और भावनात्मक उतार-चढ़ाव बेहतरीन थे। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना सुकून देता है।
जब आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह, तो इस नाटक ने दिल छू लिया। छोटी बच्ची की मासूमियत और उसकी आँखों में छुपी चालाकी देखकर हैरानी होती है। रात के दृश्य में तनाव और डर का माहौल इतना गहरा है कि लगता है हम भी उसी घर में फँसे हैं। पात्रों के बीच की टकराहट और भावनात्मक उथलपुथल ने कहानी को जीवंत बना दिया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना सच में एक अलग अनुभव है।