कम अंकों पर वरुण मल्होत्रा को पिता सूरज मल्होत्रा ने तिरस्कृत किया, स्कूल छुड़वाकर चरवाहा बना दिया। उधर उम्मीदों का बोझ ढो रहे कबीर मल्होत्रा ने गबन किया और फँस गया। वरुण मल्होत्रa शून्य से उठकर “समृद्धि डेयरी” का संस्थापक बनता है, तब सूरज मल्होत्रa को अपनी भूल का एहसास होता है।