माफिया डैडी के छह अनोखे बच्चे में वो पल जब बच्चे पर्दे से निकलते हैं, दिल दहल जाता है। बूढ़े दादा की आँखों में दर्द, माँ की चीख, और बच्चों का डर—सब कुछ इतना तीव्र है कि सांस रुक जाए। अस्पताल का फ्लैशबैक तो जैसे दिल के टुकड़े कर देता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल मोड़ देखना असली सिनेमा का मज़ा देता है।