वह सिंहासन पर बैठा मुस्कुरा रहा था, जैसे सब कुछ उसके काबू में हो। लेकिन नकली मौत, सच्ची ज़िंदगी की कहानी बताती है कि ताज पहनने वाले अक्सर अकेले होते हैं। उसकी मुस्कान के पीछे छिपा दर्द कोई नहीं देख पाया।
उसने प्याला उठाया और पी गई, जैसे जान देना मंजूर हो लेकिन झुकना नहीं। नकली मौत, सच्ची ज़िंदगी में यही तो असली ड्रामा है जब प्यार ही जहर बन जाए। उसकी हिम्मत देखकर लगता है कि वह हारने वाली नहीं है।
वह रोई नहीं, बस चुपचाप देखती रही। नकली मौत, सच्ची ज़िंदगी में खामोशी सबसे बड़ा शोर होती है। उसकी आँखों में सवाल थे जो कभी जुबां पर नहीं आए, और यही वजह है कि यह सीन इतना दर्दनाक लगता है।
दोनों के बीच की दूरी सिर्फ कमरे की नहीं, दिलों की भी थी। नकली मौत, सच्ची ज़िंदगी दिखाता है कि कैसे सत्ता रिश्तों को कैसे तोड़ देती है। वह राजा था, वह रानी, लेकिन दोनों कैदी थे अपने ही महल के।
जब प्याला टूटा, तो शायद उसकी आखिरी उम्मीद भी टूट गई। नकली मौत, सच्ची ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब लगता है कि अब कुछ बचा ही नहीं। लेकिन शायद यहीं से नई शुरुआत होती है, टूटे हुए टुकड़ों से।