उस युवक ने जब घंटी बजाई तो लगा जैसे किसी बड़े रहस्य का पर्दाफाश हो गया हो। आसमान में बैठे उस बूढ़े गुरु की चिंता साफ दिख रही थी। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु की कहानी में ऐसा मोड़ नहीं देखा था। नीचे खड़े लोग उसका मजाक उड़ा रहे थे पर उसे नहीं पता वह क्या करने वाला है। सबकी सांसें थमी हुई थीं।
बादलों के ऊपर का नज़ारा सच में जादूई था। सफेद बालों वाले बाबा और लाल वस्त्र धारी के बीच की बातचीत बहुत गंभीर लग रही थी। बीच में घायल व्यक्ति का खून देखकर डर लगा। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में साहसिक दृश्य के साथ भावना भी है। तलवारों पर खड़े होकर बात करना कमाल का दृश्य था। हवा में तैरना असली लग रहा था।
कोर्टयार्ड में खड़े लोग उस लड़के को क्यों चिढ़ा रहे हैं? नीले कपड़ों वाले लड़के की हंसी बहुत खल रही थी। पर लगता है मुख्य पात्र चुपचाप सब सह रहा है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में ऐसे सीन दिल को छू लेते हैं। हल्के नीले वस्त्र वाली युवती की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। वह उसे रोकना चाहती थी।
भूरे रंग के कपड़ों में वह लड़का बहुत सहज लग रहा था। भीड़ के शोर के बीच भी उसका ध्यान नहीं भटका। शायद उसे अपनी ताकत का अंदाजा है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु का यह किरदार बहुत मजबूत है। आखिर वह घंटी बजाकर क्या हासिल करना चाहता है? सबकी नजरें उसी पर टिकी थीं। उसकी आंखों में चमक थी।
सफेद दाढ़ी वाले गुरु के हाथ में वह लाल छड़ी क्या संकेत दे रही थी? उन्होंने घायल व्यक्ति को कुछ समझाया पर वह मान नहीं रहा था। ऊपर वाले लोक की राजनीति कुछ और ही है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में ऐसे पात्र कहानी को गहराई देते हैं। बादलों का बैकग्राउंड बहुत सुंदर था। रंगों का संयोजन अच्छा था।
लाल कपड़ों वाली युवती बहुत सख्त लग रही थी। उसकी आंखों में गुस्सा और चिंता दोनों थे। वह उस घायल व्यक्ति को क्यों बचाना चाहती है? (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में शक्तिशाली पात्र भी कमजोर नहीं हैं। तलवार पर खड़ी होकर बात करना उसकी ताकत दिखाता है। उसका रुख बहुत कड़ा था।
कहानी धरती से शुरू होकर सीधे बादलों में पहुंच गई। यह बदलाव बहुत सुचारू था। नीचे लोग हंस रहे थे और ऊपर लोग चिंतित थे। यह विरोधाभास बहुत अच्छा लगा। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु की कहानी में यह अंतर स्पष्ट दिखता है। दृश्य की गुणवत्ता भी इस मंच पर अच्छी है। देखने में मजा आया।
काले और नीले चमड़े के कपड़े वाले लड़के को लगता है वह बहुत ताकतवर है। वह दूसरों को नीचा दिखाकर खुश हो रहा है। पर कहानी में अक्सर वही हारता है। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में ऐसे खलनायक जरूरी हैं। उसकी हंसी देखकर गुस्सा आ रहा था। उसे सबक मिलना चाहिए।
वह बड़ी सी कांसे की घंटी साधारण नहीं लग रही थी। उस पर बने निशान बहुत पुराने थे। जब वह लड़का उसके पास गया तो हवा में कुछ अलग ही हो गया। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु में ऐसे सामान कहानी का हिस्सा बनते हैं। सबको लगा वह नहीं बजा पाएगा पर उसने कोशिश की। घंटी की आवाज गूंजी।
पूरे दृश्य में एक अलग ही जादू था। चाहे वह ऊपर के देवता हों या नीचे के साधारण लोग। सब कुछ एक धागे में बंधा हुआ लग रहा था। (डबिंग) अजेय झाड़ूवाला साधु देखकर लगा कि यह सीरीज लंबी चल सकती है। किरदारों के बीच का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। अंत का इंतजार रहेगा।