हर फ्रेम में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। हरे कुर्ते वाला शख्स जब बंदूक तानता है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। घुटनों के बल गिरे सैनिक की आंखों में डर और अपमान दोनों झलक रहे हैं। पीछे खड़ी औरतें चुपचाप देख रही हैं, लेकिन उनकी नजरें कहानी बता रही हैं। एशिया का सबसे बड़ा तलवारबाज: वर्चस्व की जंग में ऐसे दृश्य ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं। आंगन का माहौल, पुरानी इमारतें, हथियारों की व्यवस्था — सब कुछ इतिहास के पन्नों से उठा हुआ लगता है। जब वह औरत आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ती है, तो लगता है जैसे कोई नया मोड़ आने वाला हो।