स्नातक समारोह में इतना बड़ा हंगामा मैंने पहले कभी नहीं देखा। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की कहानी में जब स्नातक समारोह में झगड़ा होता है तो दिल धक से रह जाता है। बेरेट वाली लड़की की हिम्मत देखकर मैं दंग रह गया। जब उसने फोन मिलाया तो सबकी बोलती बंद हो गई। ऐसे पल बार बार देखने को मिलते नहीं हैं। मुझे यह मंच बहुत पसंद आया।
वेदांत सिंघानिया की एंट्री ने सबके होश उड़ा दिए। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में ऐसा ट्विस्ट कोई नहीं सोच सकता था। चमचमाती गाड़ियां और उनका रौबदार अंदाज देखकर लगता है कि अब खेल पलटने वाला है। जो लोग मजाक उड़ा रहे थे अब चुप खड़े हैं। यह दृश्य सिनेमा जैसा लग रहा था। मुझे ऐसे ड्रामे देखना बहुत अच्छा लगता है जहां सच्चाई सामने आती है।
बेरेट पहनी लड़की की अदाकारी बहुत ही लाजवाब है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में उसका धैर्य देखकर मैं हैरान रह गया। जब सब उसे नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे तब भी वह डटी रही। उसने फोन उठाया और सब कुछ बदल दिया। ऐसे किरदार निभाना आसान नहीं होता। मुझे यह किरदार बहुत प्रभावशाली लगा। यह कहानी हमें सिखाती है कि हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
पैसे दिखाकर अपमान करना बहुत बुरा लगता है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में यह दृश्य देखकर मेरा खून खौल उठा। लेकिन अंत में जब सच्चाई सामने आई तो मजा आ गया। कोट वाले व्यक्ति का चेहरा देखने लायक था। उसकी हंसी गायब हो गई। ऐसे पल दर्शकों को बहुत पसंद आते हैं। मुझे यह ड्रामा बहुत रोमांचक लगा। यह कहानी समाज की सच्चाई दिखाती है।
पोलका डॉट सूट वाली महिला का रिएक्शन देखने लायक था। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में जब उसे सच्चाई पता चली तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उसने सोचा था सब उसकी मुट्ठी में है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ऐसे मोड़ कहानी को बहुत रोचक बनाते हैं। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आया। यह हर किसी को देखना चाहिए।
सभागार में बैठे लोगों के चेहरे भी देखने लायक थे। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में जब हंगामा हुआ तो सब हैरान थे। कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था। यह माहौल बहुत तनावपूर्ण था। जब गाड़ियां आईं तो सबकी सांसें रुक गईं। ऐसे दृश्य बनाना आसान नहीं है। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आया। यह कहानी बहुत ही रोमांचक है।
फोन की एक कॉल ने सब कुछ बदल दिया। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में यह पल सबसे महत्वपूर्ण था। लड़की ने बिना कुछ कहे बस फोन मिलाया। और फिर देखते ही देखते सब कुछ पलट गया। यह शक्तिशाली संदेश देता है। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आया। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चाई जीतती है।
चश्मे वाले व्यक्ति का रवैया बहुत घमंडी लग रहा था। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में जब उसकी बोलती बंद हुई तो मजा आ गया। उसने सोचा था वह सब कुछ नियंत्रण कर सकता है। लेकिन उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। ऐसे किरदार कहानी में जान डालते हैं। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आया। यह कहानी बहुत ही रोमांचक है।
इस कहानी में भावनाओं का बहुत गहरा खेल है। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद में हर किरदार का अपना दर्द है। लड़की की आंखों में आंसू और गुस्सा साफ दिख रहा था। जब सब कुछ ठीक हुआ तो राहत मिली। ऐसे ड्रामे दिल को छू लेते हैं। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आया। यह कहानी बहुत ही रोमांचक है।
यह ड्रामा हर किसी को देखना चाहिए। असली वारिस: खाली हाथ पर हौसले बुलंद की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है। इसमें संघर्ष और जीत दोनों हैं। अभिनय बहुत ही शानदार है। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आया। यह कहानी बहुत ही रोमांचक है। मैं इसे सबको देखने की सलाह दूंगा। यह मंच बहुत अच्छा है। इसके डायलॉग भी बहुत दमदार हैं।