शुरुआत में ही पादरी का गला घोंटा जाना और फिर उसकी भीख मांगती आंखें देखकर रोंगटे खड़े हो गए। ठुकराए हुए साथी का पीछा में इतनी हिंसा कम ही देखी है। युवक के चेहरे पर वो पागलपन और खून से सने कपड़े किसी डरावने सपने जैसे लग रहे थे। चर्च का माहौल और मोमबत्तियों की रोशनी ने डर को और गहरा कर दिया।
कवच पहने नाइट का घुटने टेकना और फिर युवक के सामने झुक जाना दिखाता है कि सत्ता कैसे बदलती है। ठुकराए हुए साथी का पीछा में पावर डायनामिक्स बहुत तेजी से शिफ्ट होते हैं। नाइट की आंखों में डर और सम्मान दोनों साफ दिख रहे थे, जबकि युवक मुस्कुरा रहा था। ये सीन बताता है कि असली ताकत किसके पास है।
अंत में युवक का अपने ही खून को चाटना और उंगलियों पर लगे खून को देखकर मुस्कुराना सच में अजीब था। ठुकराए हुए साथी का पीछा में ऐसे सीन्स दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी आंखों में लालिमा और चेहरे पर वो विजयी मुस्कान बता रही थी कि वो इंसान नहीं, कुछ और ही है। ये ट्विस्ट बिल्कुल उम्मीद नहीं था।
बड़े चर्च में सूरज की किरणें और धूल के कण उस डरावने माहौल को और भी गहरा बना रहे थे। ठुकराए हुए साथी का पीछा का सेट डिजाइन कमाल का है। जब पादरी जमीन पर गिरा और युवक खड़ा रहा, तो लगा जैसे बुराई ने अच्छाई पर जीत पा ली हो। हर फ्रेम में एक अलग ही तनाव था जो दर्शक को जकड़ लेता है।
जब युवक ने नाइट के सामने वो खौफनाक मुस्कान दी, तो समझ आ गया कि कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। ठुकराए हुए साथी का पीछा में किरदारों के भाव बहुत गहरे हैं। उसकी चोटें और खून से सना शरीर दर्द बता रहा था, पर उसकी आंखें कुछ और ही कहानी कह रही थीं। ये किरदार बहुत रहस्यमयी लग रहा है।
पादरी जो शुरू में इतना घमंडी लग रहा था, वो कैसे भीख मांग रहा था ये देखना दिलचस्प था। ठुकराए हुए साथी का पीछा में किरदारों का विकास बहुत तेज है। उसका रोना और कांपना दिखाता है कि उसे अपनी गलती का अहसास हो गया है। पर क्या अब बहुत देर हो चुकी है? ये सवाल दिमाग में आता है।
नाइट का भारी कवच और उस पर बना भेड़िए का निशान बहुत प्रभावशाली था। ठुकराए हुए साथी का पीछा में कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने कमाल कर दिया है। वो युवक के सामने घुटने टेककर अपनी मजबूरी दिखा रहा था। उसकी आंखों में साफ दिख रहा था कि वो डरा हुआ है, पर अपने कर्तव्य में बंधा हुआ है।
युवक के कपड़ों पर बना भेड़िए का निशान और खून के धब्बे किसी श्राप की तरह लग रहे थे। ठुकराए हुए साथी का पीछा में विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत मजबूत है। जब वो अपने सीने पर हाथ रखता है, तो लगता है जैसे वो दर्द महसूस कर रहा हो, पर फिर वो मुस्कुरा देता है। ये विरोधाभास किरदार को और दिलचस्प बनाता है।
वीडियो का अंत बहुत सस्पेंसफुल था जब युवक अकेला बिस्तर पर बैठकर खून चाट रहा था। ठुकराए हुए साथी का पीछा में हर एपिसोड के अंत में ऐसा कुछ होता है जो अगला एपिसोड देखने पर मजबूर कर दे। उसकी उंगलियों पर लगा खून और चेहरे पर संतुष्टि बता रही थी कि उसे ताकत मिल गई है।
इस छोटे से क्लिप में इतनी सारी भावनाएं देखने को मिलीं - डर, गुस्सा, पागलपन और शक्ति। ठुकराए हुए साथी का पीछा दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधे रखता है। पादरी की आंखों का आंसू और युवक की हंसी एक ही फ्रेम में देखना किसी थ्रिलर से कम नहीं था। ये शो सच में अपने नाम को सार्थक कर रहा है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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