एक आधुनिक स्नाइपर 1946 में अंधे आदित्य वर्मा के शरीर में जन्म लेता है। घर बर्बाद है: भाई मरा है, भाभी तारा सिंह संघर्ष कर रही है, जंगल पर चाचा राकेश का कब्जा है। तारा सब संभालती है और आदित्य की आँखों का इलाज कराना चाहती है। आदित्य अपने पिछले जन्म के हुनर से अंधेपन में भी निशाना लगाना सीख जाता है, लेकिन गाँव वालों को यकीन नहीं। तारा एक खतरनाक शिकार प्रतियोगिता में घायल हो जाती है। तब आदित्य को अपनी असली ताकत दिखानी ही पड़ती है। क्या वो तारा के लिए वह कर पाएगा, जो कोई अंधा नहीं कर सकता?
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एक आधुनिक स्नाइपर 1946 में अंधे आदित्य वर्मा के शरीर में जन्म लेता है। घर बर्बाद है: भाई मरा है, भाभी तारा सिंह संघर्ष कर रही है, जंगल पर चाचा राकेश का कब्जा है। तारा सब संभालती है और आदित्य की आँखों का इलाज कराना चाहती है। आदित्य अपने पिछले जन्म के हुनर से अंधेपन में भी निशाना लगाना सीख जाता है, लेकिन गाँव वालों को यकीन नहीं। तारा एक खतरनाक शिकार प्रतियोगिता में घायल हो जाती है। तब आदित्य को अपनी असली ताकत दिखानी ही पड़ती है। क्या वो तारा के लिए वह कर पाएगा, जो कोई अंधा नहीं कर सकता?
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एक आधुनिक स्नाइपर 1946 में अंधे आदित्य वर्मा के शरीर में जन्म लेता है। घर बर्बाद है: भाई मरा है, भाभी तारा सिंह संघर्ष कर रही है, जंगल पर चाचा राकेश का कब्जा है। तारा सब संभालती है और आदित्य की आँखों का इलाज कराना चाहती है। आदित्य अपने पिछले जन्म के हुनर से अंधेपन में भी निशाना लगाना सीख जाता है, लेकिन गाँव वालों को यकीन नहीं। तारा एक खतरनाक शिकार प्रतियोगिता में घायल हो जाती है। तब आदित्य को अपनी असली ताकत दिखानी ही पड़ती है। क्या वो तारा के लिए वह कर पाएगा, जो कोई अंधा नहीं कर सकता?
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