जब उसने पत्थर को छुआ और रंगीन रोशनी निकली, तो लगा जैसे मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार का कोई जादू चल रहा हो। लेकिन फिर 'निचली जड़' लिखा आया और सब हंसने लगे। उसका चेहरा देखकर दिल पसीज गया, इतनी उम्मीद के बाद निराशा। सफेद कपड़ों वाला शख्स तो बिल्कुल घमंडी लग रहा है, जैसे उसे सब पता हो।
वो सफेद कपड़ों वाला आदमी जब उठा और पत्थर के पास गया, तो माहौल बदल गया। उसने हाथ रखते ही 'उच्च जड़' दिखा दिया। सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाले सीन जैसा एहसास हुआ जब उसने नीचे बैठे लड़के की तरफ देखा। उसकी मुस्कान में कितना अहंकार था, ये देखकर गुस्सा आ रहा था।
नीले कपड़ों वाला लड़का जब पत्थर से टकराया और गिर गया, तो लगा जैसे उसकी किस्मत ही टूट गई हो। उसकी आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। फिर जब सफेद वाला आया और उसकी मदद करने के बजाय ताना मारा, तो गुस्सा आ गया। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार जैसी वीरता की उम्मीद थी, पर यहाँ तो बस उपहास मिला।
पीछे बैठे लोग जब ये सब देख रहे थे, तो उनकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। कोई हंस रहा था, कोई गंभीर था। वो बूढ़ा आदमी जो गेंद घुमा रहा था, उसकी आंखों में कुछ और ही चाल थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाले पल की तरह ये सीन भी किसी बड़ी साजिश की शुरुआत लग रहा था। सब कुछ इतना नाटकीय था।
वो सुंदर लड़की जब उठी और पत्थर की तरफ बढ़ी, तो लगा जैसे कोई देवी उतर आई हो। उसकी चाल में एक अलग ही तेज था। जब उसने पत्थर को छुआ और नीली रोशनी निकली, तो सब दंग रह गए। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार जैसी शक्ति का अहसास हुआ। उसका चेहरा गंभीर था, जैसे वो किसी बड़े संकट को भांप रही हो।
पहले लड़के के छूने पर पत्थर से जो रंगीन रोशनी निकली, वो बहुत खूबसूरत थी। लेकिन नतीजा बुरा निकला। फिर सफेद वाले के छूने पर सफेद और नीली रोशनी ने सबको चौंका दिया। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाले एपिसोड में भी ऐसे ही रंगों का खेल था। लगता है ये पत्थर सिर्फ ताकत नहीं, इंसान की नियत भी पहचानता है।
सफेद कपड़ों वाला जब नीचे बैठे लड़के के पास गया और उसे उठाने के बजाय नीचा दिखा रहा था, तो लगा जैसे वो दुनिया का बादशाह हो। उसकी हर हरकत में घमंड था। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाले किरदार की तरह वो भी खुद को सबसे ऊपर समझ रहा था। लेकिन कहानियां अक्सर वही हीरो बनाती हैं जो नीचे से शुरू करते हैं।
जब वो लड़का पत्थर के सामने खड़ा था, तो उसके हाथ कांप रहे थे। डर और उम्मीद का मिश्रण उसके चेहरे पर साफ था। जब नतीजा आया तो वो टूट गया। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाले सीन में भी हीरो को ऐसे ही संघर्ष से गुजरना पड़ा था। ये पल हर उस इंसान का है जो अपनी काबिलियत साबित करना चाहता है।
जब लड़की ने पत्थर को छुआ और तेज नीली रोशनी हुई, तो लगा जैसे आसमान फट गया हो। वो रोशनी सिर्फ ताकत नहीं, शुद्धता का प्रतीक भी लग रही थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाले मुकाबले में भी ऐसी ही दिव्य शक्ति का इस्तेमाल हुआ था। उस लड़की की आंखों में एक अलग ही चमक थी, जो बता रही थी कि वो साधारण नहीं है।
एक ही पत्थर, एक ही जगह, लेकिन अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नतीजे। किसी को हंसी मिली, किसी को तारीफ और किसी को ठुकराहट। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाली कहानी में भी किस्मत का ऐसा ही खेल देखा था। लगता है इस दुनिया में हुनर से ज्यादा किस्मत और पहचान मायने रखती है। ये सीन बहुत गहराई से सोचने पर मजबूर करता है।