काले लिबास में सजी महारानी का ठहराव देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब सब कुछ शांत लग रहा था, तभी मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार का वो पल आया जब हवा में तनाव छा गया। उसकी आँखों में छिपा गुस्सा और चेहरे पर जमी मुस्कान, दोनों ही खतरनाक लग रहे थे। दरबार की सजावट भव्य है, पर असली ड्रामा तो इन पात्रों के चेहरे पर चल रहा है।
नीले और लाल रंग के परिधान पहने युवक का चेहरा हर पल बदल रहा है। कभी वह हैरान है, तो कभी गुस्से में। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के दृश्य में उसकी प्रतिक्रिया सबसे ज्यादा दिलचस्प थी। वह अपनी साथी को बचाने की कोशिश करता है, पर महारानी के इशारे पर सब कुछ रुक जाता है। उसकी आँखों में डर और हिम्मत दोनों साफ झलक रहे थे।
सफेद और हरे रंग की पोशाक में सजी नायिका का तेज कुछ और ही है। वह तलवार थामे खड़ी है, पर उसकी आँखों में चिंता साफ दिख रही है। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के दौरान जब वह आगे बढ़ती है, तो लगता है जैसे वह किसी बड़े संकट को टालने की कोशिश कर रही हो। उसका अभिनय इतना सहज है कि दर्शक भी उसके साथ महसूस करने लगते हैं।
जब दरबार में अचानक हंगामा शुरू हुआ, तो सबकी सांसें थम गईं। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार का वो पल जब एक पात्र दूसरे पर टूट पड़ा, तो लगा जैसे सब कुछ बिखर जाएगा। महारानी का शांत चेहरा और बाकी लोगों की घबराहट का कंट्रास्ट देखने लायक था। हर कोई अपनी जगह जमा हुआ है, पर डर सबके चेहरे पर साफ दिख रहा था।
सिंहासन पर बैठी महारानी ने बिना कुछ कहे ही सबको डरा दिया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो बता रही थी कि वह सब कुछ जानती है। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के दौरान जब वह उठी, तो लगा जैसे समय थम गया हो। उसका हर इशारा किसी आदेश से कम नहीं था। काले लिबास में वह किसी देवी से कम नहीं लग रही थीं।
नीले वस्त्र वाले युवक और सफेद पोशाक वाली युवती के बीच का रिश्ता बहुत गहरा लगता है। जब वह उसे पकड़कर बचाने की कोशिश करता है, तो लगता है जैसे वह अपनी जान भी दे दे। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के दौरान उनकी नज़रें मिलती हैं और सब कुछ कह जाती हैं। उनका साथ देखकर लगता है कि वे किसी बड़ी मुसीबत में फंस चुके हैं।
दरबार की सजावट इतनी भव्य है कि हर कोने से सोना झलकता है। पर इस खूबसूरती के पीछे छिपा ड्रामा और भी गहरा है। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के दृश्य में जब सब कुछ टूटता है, तो लगता है जैसे यह महल ही हिल जाए। हर पात्र का अपना रंग और अपना अंदाज है जो इस कहानी को और भी रोचक बनाता है।
जब गुस्से में एक पात्र ने दूसरे पर हमला किया, तो सबकी सांसें थम गईं। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार का वो पल जब तलवारें निकलीं, तो लगा जैसे अब सब खत्म हो जाएगा। पर महारानी का ठहराव सबको रोक लेता है। उसकी आँखों में छिपा गुस्सा और चेहरे पर जमी मुस्कान, दोनों ही खतरनाक लग रहे थे।
तलवारें निकलते ही दरबार में तनाव चरम पर पहुंच गया। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के दौरान हर कोई अपनी जगह जमा हुआ है, पर डर सबके चेहरे पर साफ दिख रहा था। नायिका की तलवार और नायक की बेचैनी, दोनों ही इस दृश्य को और भी रोचक बना रहे थे। महारानी का शांत चेहरा सबके लिए एक सबक था।
जब सब कुछ शांत हुआ और महारानी ने अपनी जगह से उठकर कदम बढ़ाए, तो लगा जैसे अब असली खेल शुरू होगा। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के बाद का वो पल जब सबकी नज़रें उस पर टिकी थीं, तो लगा जैसे वह कुछ बड़ा घोषित करने वाली है। उसकी आँखों में छिपा राज जानने की उत्सुकता अब और भी बढ़ गई है।