जब वह काली कार से उतरी तो पूरा माहौल बदल गया। भिखारिन बनेगी मालकिन में यह सीन सबसे बेहतरीन है। उसकी ड्रेस और आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वह किसी रानी से कम नहीं है। गांव वालों की प्रतिक्रियाएं बहुत ही असली लगती हैं, जैसे वे सच में किसी बड़े शहर से आए मेहमानों को देख रहे हों।
लाल साड़ी वाली सास का चेहरा देखकर लगता है कि वह बहुत खुश हैं, लेकिन आंखों में एक अजीब सी चमक है। भिखारिन बनेगी मालकिन की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण है। जब बहू ने अपना कार्ड दिखाया तो सास की मुस्कान और भी चौड़ी हो गई। लगता है पैसों की चमक सबको अंधा कर देती है।
मारून सूट वाले पति का किरदार बिल्कुल बेरंग लगता है। वह बस अपनी पत्नी के पीछे-पीछे चल रहा है और लाल बैग ले जा रहा है। भिखारिन बनेगी मालकिन में हीरोइन का किरदार इतना मजबूत है कि हीरो की जरूरत ही नहीं पड़ती। शायद यही आधुनिक कहानियों का ट्रेंड है जहां औरतें सब कुछ संभालती हैं।
जब अमीर जोड़ा आया तो गांव वालों की भीड़ जमा हो गई। सबके चेहरे पर लालच और उत्सुकता साफ दिख रही थी। भिखारिन बनेगी मालकिन में यह दिखाया गया है कि कैसे पैसे के आगे लोग कैसे बदल जाते हैं। बूढ़ी अम्मा का हंसना और लाल बैग पकड़ना बहुत ही मासूमियत भरा लगता है।
जब हीरोइन ने नीला कार्ड निकाला तो सबकी सांसें रुक गईं। भिखारिन बनेगी मालकिन में यह कार्ड किसी जादू की छड़ी से कम नहीं है। एक पल में सबकी नजरें बदल गईं। यह दिखाता है कि आज के दौर में इंसान की पहचान उसके कपड़ों या कार्ड से होती है, उसके इंसानियत से नहीं।