दादी का गुस्सा साफ दिख रहा था, जबकि बॉस चुपचाप सब सह रहे थे। लगता है परिवार में कुछ बड़ा गड़बड़ है। बॉस मुझसे शादी थोप रहे हैं! जैसी स्थिति में फंसे हुए लग रहे थे। अस्पताल के कॉरिडोर में चलती यह बहस किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। हर कदम पर तनाव और अनकही बातें थीं।
उस लड़की की आंखों में डर और मासूमियत साफ झलक रही थी। वह बस अपना काम कर रही थी, लेकिन सबकी नज़रें उस पर थीं। बॉस मुझसे शादी थोप रहे हैं! वाली कहानी में वह अनजाने में फंस गई लगती है। अस्पताल की भीड़ में भी उसकी अकेलापन साफ दिख रहा था।
काले चश्मे वाले बॉडीगार्ड्स पीछे खड़े थे, जैसे कोई बड़ा राज छिपा हो। बॉस की हरकतें और दादी का गुस्सा सब कुछ और भी रहस्यमय बना रहा था। बॉस मुझसे शादी थोप रहे हैं! जैसी स्थिति में यह सब और भी डरावना लग रहा था। हर कदम पर खतरा महसूस हो रहा था।
अस्पताल का माहौल वैसे ही तनावपूर्ण होता है, लेकिन यहां तो और भी ज्यादा था। बॉस और दादी की बहस, लड़की की चुप्पी, और बॉडीगार्ड्स की मौजूदगी सब कुछ और भी गंभीर बना रही थी। बॉस मुझसे शादी थोप रहे हैं! जैसी कहानी में यह सब और भी दिलचस्प लग रहा था।
दादी की हरी साड़ी और भारी ज्वेलरी साफ बता रही थी कि वह किसी बड़े परिवार से हैं। उनका गुस्सा और अंदाज सब कुछ और भी ड्रामेटिक बना रहा था। बॉस मुझसे शादी थोप रहे हैं! जैसी स्थिति में उनकी मौजूदगी और भी अहम लग रही थी। हर चीज में एक स्टेटमेंट था।