इस वेब सीरीज बंजर का बलिदान ने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए हैं। शुरू में चाकू लेकर खड़ा वह शख्स सच में बहुत डरावना लग रहा था। नायक ने हिम्मत दिखाकर उस लड़की को बचाया था। तंबू वाला सीन बहुत इमोशनल था। फिर ट्रक वाला ट्विस्ट देखकर मेरा दिमाग घूम गया। क्या वह लड़की वही है। हर दृश्य में सस्पेंस बना हुआ है। नेटशॉर्ट पर देखने का मजा ही अलग है।
बंजर का बलिदान की कहानी में जो मोड़ आया वह किसी ने नहीं सोचा था। रेड ड्रेस वाली लड़की का अंदाज देखकर नायक की हालत खराब हो गई थी। क्या वह खलनायक के साथ मिली हुई है। रेगिस्तान का माहौल और खतरे की घंटी हर पल बजती रहती है। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि आप खुद को उस ट्रक में बैठे पाएंगे।
कपड़े फटे हुए और चेहरे पर चोटें, उस लड़की की हालत देखकर दिल दहल गया था। बंजर का बलिदान में दिखाया गया संघर्ष बहुत रियल लगता है। नायक ने बिना कुछ पूछे उसकी मदद की थी। लेकिन क्या यह मदद किसी बड़ी मुसीबत को दावत दे रही है। रात के दृश्य की सिनेमेटोग्राफी कमाल की है।
वह बूढ़ा शख्स जिसके हाथ में चाकू था, उसकी हंसी आज भी कानों में गूंज रही है। बंजर का बलिदान में विलेन का किरदार बहुत मजबूत लिखा गया है। ट्रक के अंदर जब वह घुसा तो नायक की आंखों में डर साफ दिख रहा था। आगे क्या होगा यह जानने के लिए मैं बेताब हूं।
सुनसान रास्तों और ऊंचे पहाड़ों के बीच यह कहानी बहुत गहरी उतरती है। बंजर का बलिदान का हर एपिसोड नया सवाल खड़ा करता है। ट्रक ड्राइवर और वह रहस्यमयी लड़की, इनके बीच क्या समझौता हुआ है। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज जरूर देखें। वजह है इसका अनोखा प्लॉट।
बेचारा नायक किस मुसीबत में फंस गया है। पहले जान बचाई, अब जान को खतरा है। बंजर का बलिदान में दिखाया गया हर इमोशन दिल को छू लेता है। जब वह लड़की ट्रक में चढ़ी तो उसकी आंखों में चमक कुछ और ही थी। क्या यह कोई चाल है। जानने के लिए देखते रहिए।
रात में जख्मी थी और सुबह रेड सीक्विन ड्रेस में। यह बदलाव बहुत संदिग्ध है। बंजर का बलिदान की स्क्रिप्ट में ऐसे ही पेंच होते हैं। खलनायक का ट्रक में आना और नायक का चुप रहना, यह सब कुछ गड़बड़ लग रहा है। क्या यह कोई साजिश है। सस्पेंस बरकरार है।
उस रात तंबू में जो हुआ, उसने कहानी का रुख मोड़ दिया था। बंजर का बलिदान में छोटे-छोटे विवरण बहुत मायने रखते हैं। नायक ने उसे कपड़े दिए, लेकिन क्या उसने विश्वास जीता या खोया। चेहरे के भाव देखकर लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। यह सफर आसान नहीं होगा।
ट्रक के अंदर का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। तीन लोग और एक खामोशी। बंजर का बलिदान में डायलॉग से ज्यादा एक्शन और भाषा बोलती है। खलनायक का हाथ लड़की की कमर पर देखकर नायक का चेहरा लाल हो गया। आगे की लड़ाई कौन लड़ेगा। यह देखना बाकी है।
इस सीरीज का क्लाइमेक्स क्या होगा कोई नहीं जानता। बंजर का बलिदान ने दर्शकों को बांधकर रखा है। रेगिस्तान की राहों में यह ट्रक किस मंजिल की ओर जा रहा है। क्या नायक बच पाएगा या फिर वह शिकार बन जाएगा। हर पल नया ट्विस्ट लेकर आता है।